नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहा पीआईएल प्लांट


प्रदूषण नियमों के उल्लंघन का प्वाइंट-वाइज एक्सपोज़


चांपा
चांपा स्थित पीआईएल प्लांट द्वारा लगातार पर्यावरण नियमों की अनदेखी की जा रही है। प्लांट से निकल रहा जहरीला धुआं इस बात का सबूत है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं।


प्वाइंट-वाइज उल्लंघन


1️⃣ बिना प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण उपकरण के संचालन
नियमों के अनुसार उद्योगों में स्क्रबर, ईएसपी (ESP) या फिल्टर सिस्टम का प्रभावी होना अनिवार्य है, लेकिन पीआईएल प्लांट से उठता काला/जहरीला धुआं साफ दर्शाता है कि या तो उपकरण खराब हैं या जानबूझकर बंद रखे जाते हैं।


2️⃣ खुले आसमान में जहरीले धुएं का उत्सर्जन
पर्यावरण नियमों के तहत उत्सर्जन की तय सीमा होती है, लेकिन यहां धुआं बिना किसी नियंत्रण के खुले वातावरण में छोड़ा जा रहा है, जिससे आसपास का इलाका सीधे प्रभावित हो रहा है।


3️⃣ आबादी वाले क्षेत्र में प्रदूषण फैलाना
नियमों के अनुसार आबादी के पास स्थित उद्योगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है, लेकिन पीआईएल प्लांट से निकलता धुआं रहवासी इलाकों तक पहुंच रहा है, जो सीधे जनस्वास्थ्य पर हमला है।


4️⃣ एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग में लापरवाही
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों के अनुसार निरंतर एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग जरूरी है। सवाल यह है कि क्या पीआईएल प्लांट में रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो रही है या सिर्फ कागजों में रिपोर्ट तैयार की जा रही है?


5️⃣ स्वास्थ्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी
आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों के लिए किसी भी प्रकार की चेतावनी, सुरक्षा व्यवस्था या स्वास्थ्य जांच की कोई व्यवस्था नजर नहीं आती, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है।


जहरीली हवा पर चुप प्रशासन

कलेक्टर और PCB की भूमिका सवालों के घेरे में
चांपा
पीआईएल प्लांट से हो रहे खुलेआम प्रदूषण को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) की चुप्पी अब संदेह के घेरे में है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब नियमों का उल्लंघन इतना स्पष्ट है, तो अब तक जिला कलेक्टर और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?


क्या निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है?
या फिर प्लांट प्रबंधन के प्रभाव में अधिकारी जनता की सेहत को नजरअंदाज कर रहे हैं?


स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न तो सैंपलिंग की जानकारी सार्वजनिक की गई, न ही किसी प्रकार की नोटिस या सीलिंग की कार्रवाई सामने आई। इससे यह संदेश जा रहा है कि जिले में उद्योग नियमों से ऊपर हैं और आम जनता की सांसें सबसे सस्ती हैं।


अब देखना यह होगा कि
➡️ जिला कलेक्टर इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच के आदेश देते हैं या नहीं,
➡️ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पीआईएल प्लांट की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट सार्वजनिक करता है या नहीं,
➡️ और जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वाले प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा।
जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहती है।

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