आवारा कुत्तों व तेज रफ्तार वाहनों से गायों की मौत, ग्राम कुरदा में बढ़ी चिंता

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भरी वाहनों की चपेट में आकर सड़क पर मृत मवेशी

आवारा कुत्तों व तेज रफ्तार वाहनों से गायों की मौत, ग्राम कुरदा में बढ़ी चिंता


रेडियम बांधने व सामूहिक पहल की मांग

जांजगीर-चांपा। चांपा से महज दो किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कुरदा में इन दिनों गायों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता का माहौल है। ग्रामीणों के अनुसार हाल के दिनों में लगभग पांच से सात गायों एवं उनके बछड़ों की मौत हो चुकी है। कुछ मामलों में आवारा कुत्तों के हमले की बात सामने आई है, वहीं कई गायें सड़क पर खड़े रहने के दौरान भारी वाहनों की चपेट में आ रही हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि खेतों और खलिहानों में पैरा (फसल अवशेष) जलाए जाने की प्रवृत्ति के कारण पशुओं को पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है। आगजनी से जहां पर्यावरण को नुकसान होता है, वहीं खेतों में रहने वाले जीव-जंतु भी प्रभावित होते हैं। चारा के अभाव में गायें सड़क किनारे या सड़क पर आ जाती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार वाहन चालक टक्कर मारकर मौके से चले जाते हैं, जिसके बाद गांववासी ही घायल गायों का उपचार कराने का प्रयास करते हैं। इसी क्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने घायल पशुओं को प्राथमिक उपचार और दवा उपलब्ध कराई।

इस संबंध में विश्व हिंदू परिषद जिला समरसता प्रमुख योगेश साहू ने कहा कि शासन द्वारा घुमंतू गायों के गले में रेडियम पट्टी बांधने की पहल सराहनीय है, ताकि रात में वाहन चालकों को पशु दिखाई दे सकें और दुर्घटनाएं रोकी जा सकें। उन्होंने ग्राम में घूमने वाली सभी गायों और बछड़ों को रेडियम बांधने की मांग की।

योगेश साहू के साथ शानू राजपूत, राकेश साहू, प्रिंस राठौर, शिवम तिवारी, किशन, रूपेश, कुनाल, राजेंद्र, विकास, निक्कू और राहुल सहित अन्य युवाओं ने भी घायल गायों के उपचार में सहयोग किया और ग्रामवासियों से पशुओं की देखभाल व सुरक्षा के लिए एकजुट होने की अपील की।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी के लिए यह स्थिति गंभीर हो सकती है। गांव स्तर पर सामूहिक पहल, पशुओं के लिए चारा व्यवस्था, पैरा जलाने पर रोक और सड़क सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने की मांग की जा रही है।

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