



क्या जांजगीर-चांपा में पहुंच चुका है ‘पुष्पा भाऊ’? करोड़ों की अवैध लकड़ी जब्ती से मचा हड़कंप
जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध इमारती लकड़ियों की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद सनसनी फैल गई है। मंगलवार को वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए भारी मात्रा में लकड़ियों का जखीरा जब्त किया। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका भी जताई जा रही है।
वन विभाग के अधिकारी हिमांशु डोंगरे ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है। उन्होंने कहा कि “जो भी इस पूरे नेटवर्क के पीछे है, उसका जल्द खुलासा किया जाएगा।” हालांकि, इस पूरे खेल का मुख्य सरगना अब तक विभाग की पकड़ से बाहर है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
‘पुष्पा’ स्टाइल तस्करी की चर्चा
जब्त लकड़ियों की कीमत करोड़ों में आंकी जा रही है। मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है और अंतिम आंकड़े जांच पूर्ण होने के बाद ही सामने आएंगे। घटना के बाद लोगों के बीच चर्चाएं शुरू हो गई हैं और कई लोग इसे फिल्म पुष्पा: द राइज की कहानी से जोड़कर देख रहे हैं, जिसमें लाल चंदन की अंतरराष्ट्रीय तस्करी का जाल दिखाया गया था। फिल्म का चर्चित संवाद—“अगर पुष्पा मिलेगा तो माल नहीं मिलेगा, और अगर माल मिला तो पुष्पा नहीं मिलेगा”—इस घटनाक्रम पर सटीक बैठता दिखाई दे रहा है।
बंद राइस मिल में मिला जखीरा
जानकारी के अनुसार ग्राम अकलतरी से लगे ग्राम भादा में एक बंद पड़ी राइस मिल परिसर से यह लकड़ियां बरामद की गईं। बताया जा रहा है कि यह मिल पहले किसी शर्मा नामक व्यक्ति की थी और पिछले कुछ वर्षों से बंद पड़ी थी। बाद में इसे किराए पर दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन किसे किराए पर दिया गया, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। वन विभाग इस पहलू की भी गहन जांच कर रहा है।
मौके की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह गतिविधि लंबे समय से संचालित हो रही थी। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर तस्करी जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की नजर से कैसे बची रही?
15-20 ट्रक लकड़ी होने की आशंका
वन विभाग के मुताबिक, जब्त लकड़ियां करीब 15 से 20 ट्रक के बराबर हो सकती हैं। मौके से दो वाहन भी जब्त किए गए हैं—एक स्थानीय पासिंग का और दूसरा मध्यप्रदेश पासिंग का, जिसे जबलपुर क्षेत्र का बताया जा रहा है।
तेंदू-सार और खैर लकड़ी बरामद
बरामद लकड़ियों में तेंदू-सार और खैर प्रमुख रूप से शामिल हैं। खैर लकड़ी का उपयोग ‘कथा’ बनाने में होता है, जबकि तेंदू-सार की लकड़ी का उपयोग हथियारों—विशेषकर 12 बोर बंदूक के मूठ—निर्माण में होने की आशंका जताई गई है। इस पहलू को लेकर विभाग ने गहरी चिंता व्यक्त की है। अधिकारियों के अनुसार तेंदू-सार की लकड़ियों को बड़े गट्ठों से काटकर छोटे-छोटे आकार में बड़ी सफाई से तैयार किया गया था, जो संगठित तस्करी की ओर इशारा करता है।
जांच जारी, बड़े खुलासे की उम्मीद
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। संभावित साठगांठ और नेटवर्क की कड़ियों को खंगाला जा रहा है। विभाग का दावा है कि जल्द ही पूरे प्रकरण का खुलासा कर संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल जिले में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है—क्या सचमुच कोई ‘पुष्पा भाऊ’ यहां सक्रिय है, या यह किसी बड़े गिरोह का सुनियोजित खेल? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।



