




📍 पामगढ़ / मस्तूरी, जांजगीर-चांपा–बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
🚨 बड़ी खबर: उदईबान से मुड़पार तक रेत माफियाओं का नेटवर्क? जिलों के बीच कनेक्शन पर बड़ा सवाल
मस्तूरी ब्लॉक के उदईबान गांव में महानदी से जारी अवैध रेत उत्खनन अब एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। ताजा जानकारी के अनुसार, मस्तूरी ब्लॉक के ग्राम उदईबान (जिला बिलासपुर) से निकलने वाली रेत का कनेक्शन जांजगीर-चांपा जिले के माफियाओं से जुड़ता नजर आ रहा है।
🔗 जिलों के बीच ‘रेत सिंडिकेट’ का शक
सूत्रों के मुताबिक, बिलासपुर जिले के उदईबान क्षेत्र से अवैध रूप से निकाली जा रही रेत को पामगढ़ ब्लॉक के मुड़पार गांव के आसपास बड़े पैमाने पर भंडारित किया जा रहा है।
यह भंडारण आगे सप्लाई के लिए किया जा रहा है, जिससे यह पूरा मामला संगठित रेत माफिया नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
⚠️ कार्रवाई के दावे, जमीन पर खुली चुनौती
एक ओर जिला प्रशासन और अधिकारियों द्वारा अवैध खनन पर कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह नेटवर्क खुलेआम सक्रिय होकर नियम-कायदों को चुनौती देता नजर आ रहा है।
⚠️ NGT नियमों की अनदेखी, मशीनों से उत्खनन जारी
ग्रामीणों का आरोप है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों को दरकिनार कर भारी मशीनों से रेत निकाली जा रही है, जिससे नदी और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है।
🚛 PMGSY सड़क पर बढ़ा दबाव
रेत से भरे हाइवा और ट्रैक्टर प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की सड़कों से होकर गुजर रहे हैं, जिससे सड़कें टूट रही हैं और हादसों का खतरा बढ़ गया है।
🤐 अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतने बड़े स्तर पर जिलों के बीच चल रहे इस नेटवर्क की जानकारी क्या प्रशासन को नहीं है, या फिर सब कुछ जानकर भी अनदेखी की जा रही है?
🔥 पहले भी पामगढ़ में मचा था बवाल
गौरतलब है कि इससे पहले भी पामगढ़ क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर बड़ा विवाद हो चुका है। इसके बावजूद फिर से मामला सामने आना प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस कथित ‘रेत सिंडिकेट’ पर कब तक शिकंजा कसता है या फिर यह खेल यूं ही जारी रहेगा।




