


जनदर्शन में फूटा जनता का गुस्सा: चांपा नगर पालिका पर गंभीर आरोप, समाधान की जगह मिल रहा अपमान!
जांजगीर-चांपा।
नगर पालिका परिषद चांपा की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जनदर्शन जैसे महत्वपूर्ण मंच पर भी आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा, बल्कि उन्हें अभद्र व्यवहार, टालमटोल और लापरवाही का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में सामने आए दो मामलों ने व्यवस्था की पोल खोल दी है।
पहले मामले में वार्ड क्रमांक 22 के निवासी रंजन कुमार केवट ने बताया कि 18 मार्च 2026 को आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आवेदन प्रस्तुत किया था। लेकिन शिविर में न तो जिम्मेदार अधिकारी मौजूद थे और न ही उनकी समस्या का कोई निराकरण हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनदर्शन जैसे कार्यक्रमों में ही अधिकारी उपस्थित नहीं रहेंगे, तो आम जनता अपनी समस्याएं लेकर आखिर कहां जाए?
दूसरे मामले में बृहस्पति बाई यादव ने प्रशासनिक सुस्ती का गंभीर उदाहरण पेश किया। उन्होंने बताया कि 10 मार्च 2026 को मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन देने के बाद भी आज तक उन्हें प्रमाण पत्र नहीं मिला। लगभग 26 दिनों से वे लगातार नगर पालिका कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें अलग-अलग बहाने बनाकर टाल दिया जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि कर्मचारियों द्वारा उन्हें ऊपर से फाइल नहीं आने का हवाला देकर वापस लौटा दिया जाता है, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दोनों ही मामलों में आवेदकों ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
लगातार मिल रही ऐसी शिकायतों से यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या जनदर्शन सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है? क्या प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाने के बजाय कर्मचारी जनता को ही परेशान करने में लगे हैं?
अब निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इन गंभीर शिकायतों पर क्या कदम उठाता है और क्या वास्तव में आम जनता को न्याय मिल पाएगा या नहीं।




