
चांपा के पीआईएल प्लांट पर चुप क्यों है दिल्ली?
प्रधानमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से सीधे सवाल
चांपा।
देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जहां एक ओर स्वच्छ भारत, स्वच्छ हवा और सबका साथ–सबका विकास की बात करते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के चांपा स्थित प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड (पीआईएल) इन सपनों को ज़मीनी हकीकत में कुचलता नजर आ रहा है। सवाल अब सिर्फ जिला प्रशासन या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का नहीं, बल्कि सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तक पहुंच चुका है।
पीआईएल प्लांट से लगातार निकल रहा जहरीला धुआं और धूल न केवल पर्यावरण कानूनों का उल्लंघन है, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़ भी है। इसके बावजूद अब तक न तो कोई बड़ी कार्रवाई सामने आई और न ही कोई सख्त चेतावनी। यह चुप्पी अब संदेह पैदा कर रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ चुका है कि सांस लेना मुश्किल हो गया है। घरों में धूल की मोटी परत, जहरीली हवा और गंदगी के बीच जीवन जीना मजबूरी बन चुका है। सवाल यह है कि क्या यही विकास मॉडल केंद्र सरकार देशभर में दिखाना चाहती है?
अब जनता की ओर से प्रधानमंत्री और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से सीधे सवाल उठाए जा रहे हैं—
➡️ क्या पीआईएल प्लांट को केंद्रीय पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) नियमों का पालन किए बिना खुली छूट दी गई है?
➡️ क्या मंत्रालय के पास पीआईएल प्लांट के उत्सर्जन और एयर क्वालिटी की वास्तविक रिपोर्ट मौजूद है?
➡️ यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है, तो अब तक प्लांट पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
➡️ क्या आम जनता की सेहत उद्योगों के मुनाफे से कम अहम है?
➡️ “स्वच्छ हवा” के वादे सिर्फ भाषणों तक सीमित हैं या जमीन पर भी लागू होंगे?
सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्थानीय स्तर पर हुए आंदोलनों को या तो प्रशासनिक बल से दबाया गया या फिर किसी न किसी तरह से शांत करा दिया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जिला और राज्य स्तर पर आवाज दबाई जा रही हो, तो जनता आखिर जाए तो जाए कहां?
अब पूरे मामले की निगाहें केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय पर टिकी हैं। यदि केंद्र सरकार वास्तव में पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर है, तो पीआईएल प्लांट की स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच, रियल-टाइम प्रदूषण डेटा सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
जनता साफ कह रही है —
“हमें भाषण नहीं, साफ हवा चाहिए।”
अब देखना यह है कि दिल्ली तक पहुंची यह आवाज़ सुनी जाएगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
— न्यूज़ | दिल्ली तक सवाल




