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चांपा बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से जनता त्रस्त
स्मार्ट मीटर के नाम पर बढ़ी परेशानी, बड़े बकायेदारों पर मेहरबानी का आरोप

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चांपा बिजली विभाग की कार्यप्रणाली से जनता त्रस्त
स्मार्ट मीटर के नाम पर बढ़ी परेशानी, बड़े बकायेदारों पर मेहरबानी का आरोप
चांपा नगर में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ प्रदेश में पहली बार ऐसा मामला सामने आ रहा है, जहां स्मार्ट मीटर लगने के बावजूद उपभोक्ताओं की समस्याएं कम होने के बजाय और अधिक बढ़ती नजर आ रही हैं।
प्रदेशभर में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अघोषित बिजली कटौती, तकनीकी गड़बड़ियां और विभागीय लापरवाही से आम उपभोक्ता लगातार परेशान हैं। चांपा नगर में भी यही हालात बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत से आज भी बड़ी संख्या में अवैध टेंपरेरी मीटर संचालित किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि मोटी रकम लेकर वर्षों से इन मीटरों को चलने दिया जा रहा है, जिससे बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। यही कारण है कि विभाग आज स्वयं इस समस्या का समाधान करने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।
जनता का कहना है कि यदि बिजली विभाग ईमानदारी से कार्रवाई करते हुए अवैध टेंपरेरी मीटरों को या तो वैधानिक करे या हटाए, तो व्यवस्था में सुधार संभव है।
इसी बीच बिजली विभाग से जुड़ा एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि जिन उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लग चुके हैं और जिनका बिल बकाया है, उनकी बिजली अब स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि प्रदेश के कंट्रोल रूम से सीधे बंद की जा रही है। इससे उपभोक्ताओं को बिना किसी पूर्व सूचना के बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
नाम न छापने की शर्त पर चांपा नगर के एक उपभोक्ता ने बताया कि उनके बिजली बिल में बकाया राशि थी, जिसका लगभग 50 प्रतिशत वे पहले ही जमा कर चुके थे। इसके बावजूद अचानक उनका मीटर कंट्रोल रूम से बंद कर दिया गया। मीटर में बिजली चालू दिखाई दे रही थी, लेकिन घर में सप्लाई पूरी तरह ठप थी।
जब उपभोक्ता ने बिजली विभाग से संपर्क किया तो उनसे बीपी नंबर मांगा गया और बताया गया कि बकाया बिल के कारण ऊपर से बिजली बंद की गई है। विभाग पहुंचने पर अधिकारियों ने कथित रूप से कठोर रवैया अपनाते हुए कम से कम 75 प्रतिशत बकाया राशि जमा करने का दबाव बनाया।
उपभोक्ता का आरोप है कि पहले से भुगतान के बावजूद उसकी कोई सुनवाई नहीं की गई, मजबूरन उसे उधार लेकर पूरा बिल जमा करना पड़ा, तब जाकर बिजली बहाल हुई।
अब सवाल यह उठ रहा है कि छोटे और मध्यम उपभोक्ताओं पर सख्ती क्यों, जबकि नगर में मौजूद बड़े-बड़े बकायेदारों पर विभाग कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है?
जनता पूछ रही है कि क्या बिजली विभाग केवल आम लोगों को ही परेशान करेगा और प्रभावशाली बड़े बकायेदारों के सामने उसके हाथ-पैर कांप जाते हैं?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि बिजली विभाग निष्पक्ष कार्रवाई करे, बड़े बकायेदारों की भी बिजली काटी जाए और स्मार्ट मीटर प्रणाली को पारदर्शी व जनहितकारी बनाया जाए, ताकि जनता को राहत मिल सके।

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