




📰 पुलिस का अमानवीय चेहरा आया सामने, जिले में पुलिसिंग के दावे फेल
जेल से छूटकर अपनी शिकायत लेकर सीधे एसपी कार्यालय पहुंचा युवक, थाना प्रभारी पर मारपीट और रिपोर्ट न लिखने का आरोप
जांजगीर-चांपा। जिले में पुलिसिंग के दावों के बीच पुलिस का कथित अमानवीय चेहरा सामने आया है। बम्हनीडीह थाना क्षेत्र के एक युवक ने उपसरपंच, उसके परिजनों और थाना प्रभारी पर मारपीट, गाली-गलौज और प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। युवक जेल से छूटने के बाद सीधे एसपी कार्यालय पहुंचा और लिखित शिकायत देकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
प्रार्थी दिलहरण प्रसाद पटेल, निवासी ग्राम गोविंदा, ने शिकायत में बताया कि गांव की गली में गिट्टी डालकर रास्ता बंद कर दिया गया था, जिससे आने-जाने में परेशानी हो रही थी। इसी बात की शिकायत लेकर वह अपनी मां के साथ गांव के उपसरपंच गज्जू पाण्डेय के पास गया था।
आरोप है कि बात-चीत के दौरान उपसरपंच गज्जू पाण्डेय और उसके बेटे शुभम पाण्डेय ने गाली-गलौज करते हुए उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। बीच-बचाव करने आई उसकी मां को भी धक्का लगने से चोट आई।
पीड़ित का आरोप है कि घटना के बाद वह अपने माता-पिता के साथ रिपोर्ट दर्ज कराने थाना बम्हनीडीह पहुंचा, लेकिन वहां भी उसे न्याय नहीं मिला। शिकायत में कहा गया है कि धन्ना पाण्डेय के कहने पर थाना प्रभारी कृष्णपाल सिंह ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की, बल्कि उसके साथ गाली-गलौज की। इतना ही नहीं, पीड़ित ने आरोप लगाया कि थाना प्रभारी ने थाने में रखे कैदी सुधार पट्टा से तथा हाथ-पैर से मारपीट की और उसे लॉकअप में बंद कर दिया।
पीड़ित ने बताया कि जेल से छूटने के बाद वह सीधे पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा और पूरे मामले की लिखित शिकायत देकर उपसरपंच, उसके परिजनों और थाना प्रभारी के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है।
वहीं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे प्रार्थी के साथ उसके पिता ने भी आप बीती बताते हुए कहा कि मेरे एवं मेरी पत्नी की मौजूदगी में थाना प्रभारी बम्हनीडीह कृष्णपाल सिंह ने मां बहन की गंदी गाली देते हुए मारपीट की है जिससे हमारा परिवार डरा हुआ है।
इस मामले के सामने आने के बाद जिले में पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना होगा कि पुलिस अधीक्षक इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं।
जिले में पुलिसिंग के दावे फेल
एक तरफ जिले भर में अभियान चला कर पुलिस अधिक्षक महोदय के द्वारा पुलिस मित्र का घटन किया जा रहा है और दूसरी तरफ पुलिस के ऐसे अमानवीय चेहरे सामने आने से बेहतर पुलिसिंग के दावे फेल होते नजर आ रहे है।




