Prakash Industries Limited चांपा संयंत्र पर प्रदूषण के आरोप — अधिनियमों के उल्लंघन की आशंका, जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल

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Prakash Industries Limited चांपा संयंत्र पर प्रदूषण के आरोप — अधिनियमों के उल्लंघन की आशंका, जिम्मेदारों की चुप्पी पर सवाल

चांपा। नगर क्षेत्र में संचालित Prakash Industries Limited के चांपा स्थित औद्योगिक संयंत्र से कथित अत्यधिक धुआं उत्सर्जन को लेकर स्थानीय नागरिकों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लंबे समय से संयंत्र की चिमनियों से निकलने वाला घना धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, जिससे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

अब यह मामला केवल स्थानीय असुविधा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभिन्न पर्यावरणीय अधिनियमों के संभावित उल्लंघन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।




किन-किन कानूनों का हो सकता है उल्लंघन?

विशेषज्ञों के अनुसार यदि उत्सर्जन निर्धारित मानकों से अधिक पाया जाता है, तो निम्न प्रमुख अधिनियम लागू हो सकते हैं—

1. Air (Prevention and Control of Pollution) Act, 1981

यह अधिनियम औद्योगिक इकाइयों को वायु प्रदूषण नियंत्रित रखने और निर्धारित मानकों का पालन करने के लिए बाध्य करता है।

धारा 21 के तहत बिना वैध अनुमति (Consent to Operate) संचालन दंडनीय है।

धारा 22 के तहत निर्धारित उत्सर्जन मानकों का उल्लंघन प्रतिबंधित है।

उल्लंघन की स्थिति में जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।


2. Environment (Protection) Act, 1986

यह एक व्यापक केंद्रीय अधिनियम है, जिसके तहत पर्यावरण संरक्षण हेतु मानक तय किए जाते हैं।

धारा 7 के अनुसार निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषक उत्सर्जन प्रतिबंधित है।

धारा 15 के तहत उल्लंघन पर कठोर दंड का प्रावधान है।


3. Water (Prevention and Control of Pollution) Act, 1974

यदि औद्योगिक अपशिष्ट जल का निस्तारण मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है, तो यह अधिनियम भी लागू हो सकता है।

4. National Green Tribunal Act, 2010

पर्यावरणीय क्षति की स्थिति में प्रभावित पक्ष इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) में याचिका दायर कर सकते हैं।




नागरिकों की मुख्य मांगें

स्थानीय निवासियों ने निम्न मांगें रखी हैं—

संयंत्र के उत्सर्जन स्तर की स्वतंत्र तकनीकी जांच।

ऑनलाइन निरंतर उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (CEMS) का डेटा सार्वजनिक किया जाए।

यदि उल्लंघन सिद्ध हो तो संबंधित अधिनियमों के तहत दंडात्मक कार्रवाई।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल सर्वे और शिविर का आयोजन।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नियमित निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।





प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

नागरिकों का दावा है कि पूर्व में भी शिकायतें संबंधित विभागों को दी गई थीं, किंतु अब तक कोई स्पष्ट जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी को लेकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन अभी तक सामने नहीं आया है। यदि Prakash Industries Limited प्रबंधन या संबंधित विभाग की ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




आगे क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल स्थानीय पर्यावरण का नहीं, बल्कि विधिक अनुपालन का भी गंभीर मामला बन सकता है। अब देखना यह है कि क्या संबंधित विभाग स्वतः संज्ञान लेकर जांच करते हैं या प्रभावित नागरिकों को विधिक मंचों का सहारा लेना पड़ेगा।

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