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स्टेशन पर बिक रहा संदिग्ध बोतलबंद पानी, O2 ड्रॉप्स पर उठे सवाल

स्टेशन पर बिक रहा संदिग्ध बोतलबंद पानी, O2 ड्रॉप्स पर उठे सवाल

जांजगीर-चांपा। गर्मी बढ़ते ही बोतलबंद पानी की मांग तेज हो जाती है। यात्रियों से लेकर कार्यालयों तक, लोग बड़ी संख्या में मिनरल वाटर का उपयोग करते हैं। इसी बढ़ती मांग के बीच बाजार में कई नामी-गिरामी कंपनियों के साथ-साथ संदिग्ध ब्रांड भी सक्रिय हो जाते हैं। सवाल यह है कि क्या इन पानी की बोतलों की गुणवत्ता और मानक स्तर की नियमित जांच होती है या केवल पैकेजिंग के भरोसे इन्हें बाजार में उतार दिया जाता है?

ताजा मामला चांपा रेलवे स्टेशन से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार भारतीय रेल के अंतर्गत आने वाले चांपा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 स्थित कैंटीन में बिक रहे O2 ड्रॉप्स मिनरल वाटर को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक जागरूक ग्राहक द्वारा खरीदी गई पानी की बोतल के अंदर “काई” जमी हुई पाई गई, जिससे यात्रियों में हड़कंप मच गया।

बताया जा रहा है कि संबंधित बोतल पर मैन्युफैक्चरिंग डेट 20.01.2026 तथा एक्सपायरी डेट 19.06.2026 अंकित है। निर्माण के कुछ ही दिनों बाद बोतल के अंदर काई जैसी परत दिखाई देना सीधे तौर पर गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करता है। यदि ताजा पैकिंग वाले पानी की यह स्थिति है, तो लंबे समय तक रखे जाने वाले स्टॉक की स्थिति क्या होगी — यह चिंताजनक विषय है।

ग्राहक द्वारा आपत्ति जताने पर दुकानदार ने बोतल वापस लेने और बिल लौटाने की विनती की। वहीं जब ग्राहक ने कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराई, तो उसे अलग-अलग अज्ञात नंबरों से फोन कॉल आने लगे। आरोप है कि कॉल करने वालों ने अनावश्यक और भ्रामक बातचीत कर मामले को दबाने का प्रयास किया।

रेलवे परिसर में किसी भी उत्पाद की बिक्री के लिए सख्त नियम और गुणवत्ता मानकों का पालन अनिवार्य होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या संबंधित कंपनी के उत्पाद की नियमित जांच की गई थी? यदि नहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आती है।

सूत्रों के अनुसार यह पानी बिलासपुर में निर्मित बताया जा रहा है और कंपनी की “ऊंची पहुंच” की चर्चा भी आम है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब देखना यह होगा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन तथा रेलवे प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है। क्या यात्रियों की सेहत से जुड़े इस गंभीर विषय पर सख्त कदम उठाए जाएंगे या मामला समझौते की भेंट चढ़ जाएगा?

जनता का सीधा सवाल है — क्या उन्हें शुद्ध और सुरक्षित पानी मिलेगा या फिर मानकों से समझौता जारी रहेगा?

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