ग्राम खोखरा में आज होगा श्याम कार्तिक एवं भव्य नागलीला महोत्सव, नीलकमल वैष्णव देंगे जसगीत की प्रस्तुति, एक दिवसीय लगेगा मेला

videoshot 20251105 1352264083810406627656346 Console Corptech
जसगायक नीलकमल वैष्णव देंगे अपनी प्रस्तुति
img 20251105 wa01391704797930383518381 Console Corptech
कार्यक्रम की पूरी जानकारी

ग्राम खोखरा में आज होगा श्याम कार्तिक एवं भव्य नागलीला महोत्सव, नीलकमल वैष्णव देंगे जसगीत की प्रस्तुति, एक दिवसीय लगेगा मेला

जांजगीर-चांपा – जिला मुख्यालय से लगे ग्राम खोखरा में आज से श्याम कार्तिक एवं भव्य नागलीला महोत्सव का शुभारंभ किया जा रहा है। हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी यह आयोजन श्याम कार्तिक महोत्सव समिति ग्राम खोखरा के तत्वावधान में किया जा रहा है।

आचार्य दुर्गेश चतुर्वेदी के निर्देशन में प्रतिदिन सुबह-शाम आरती एवं भजन का आयोजन किया जा रहा है। समिति सदस्यों के साथ मोहल्ले एवं ग्रामीणों ने मिलकर इस धार्मिक आयोजन की पूरी तैयारी की है।

कार्यक्रम के तहत आज शाम 6 बजे ग्राम के शुकुल तालाब परिसर में नागलीला मंचन किया जाएगा। इसके बाद रात 9 से 10 बजे के बीच सुप्रसिद्ध जसगायक नीलकमल वैष्णव द्वारा जसगीत प्रस्तुति दी जाएगी।

इस अवसर पर गांव में एक दिवसीय मेला भी आयोजित किया गया है, जिसमें धार्मिक स्टॉल, झूले, प्रसाद वितरण और भक्तिमय कार्यक्रमों की विशेष व्यवस्था की गई है।

नागलीला और कार्तिक मास का महत्व:
हिंदू परंपरा में नागलीला का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह भगवान श्रीकृष्ण और कालिया नाग के बीच हुए संघर्ष का प्रतीकात्मक मंचन है, जो असत्य पर सत्य और अहंकार पर विनम्रता की विजय का संदेश देता है। श्रद्धालु इस लीला के माध्यम से धर्म, भक्ति और परोपकार की भावना को आत्मसात करते हैं।

साथ ही आज का दिन भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) का जन्मदिन होने के कारण भी अत्यंत शुभ माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास के इस पावन दिन पर भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ था, जिन्हें शौर्य, बुद्धि और धर्म की रक्षा के प्रतीक देवता माना जाता है। इस दिन पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और दान का विशेष पुण्य प्राप्त होता है।

पूरे आयोजन को लेकर ग्राम खोखरा में भक्तिमय और उत्सवमय माहौल है। आसपास के गांवों से श्रद्धालु बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने पहुंच रहे हैं। आयोजन स्थल ग्राम पंचायत भवन के पास रखा गया है, जहां श्रद्धालुओं के लिए बैठने, दर्शन और भंडारे की विशेष व्यवस्था की गई है।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

Back to top button