सबसे बड़ी प्रशासनिक अनियमितता
संयुक्त संचालक कृषि मनोज चौहान पर गंभीर आरोप: चहेतों को मनचाही पोस्टिंग से विभाग में ‘अटैचमेंट राज’!

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सबसे बड़ी प्रशासनिक अनियमितता
संयुक्त संचालक कृषि मनोज चौहान पर गंभीर आरोप: चहेतों को मनचाही पोस्टिंग से विभाग में ‘अटैचमेंट राज’!


बिलासपुर, छत्तीसगढ़। संयुक्त संचालक कृषि, बिलासपुर संभाग, मनोज चौहान पर अपने अधिकार क्षेत्र में मनमानी पोस्टिंग और अटैचमेंट करने का गंभीर आरोप लगा है। विश्वसनीय सूत्रों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के अनुसार, उन्होंने नियमों को दरकिनार करते हुए कथित तौर पर अपने “चाहते लोगों” को सुविधाजनक और मलाईदार पदों पर अटैचमेंट (संलग्नता) के माध्यम से पदस्थ कर दिया है।

व्यवस्था चरमराई, किसानों को भारी असुविधा
इस प्रशासनिक मनमानी का सीधा और सबसे बड़ा खामियाजा संभाग के किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

* कार्य प्रभावित: मनचाही जगहों पर चहेतों की तैनाती के कारण, जहां कर्मचारियों की वास्तविक जरूरत है, वहां भारी कमी हो गई है। महत्वपूर्ण मैदानी और तकनीकी कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

* योजनाओं पर असर: कृषि विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन, बीज-खाद की आपूर्ति, और किसानों को समय पर मिलने वाले तकनीकी मार्गदर्शन में बड़ी बाधा आ रही है।

* जनप्रतिनिधि नाराज़: स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस अव्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है और संयुक्त संचालक के खिलाफ उच्च अधिकारियों से लिखित शिकायत की है। उनका स्पष्ट आरोप है कि व्यक्तिगत लाभ के लिए शासकीय व्यवस्था को ठप किया जा रहा है।

नियमों का खुला उल्लंघन!
यह अटैचमेंट प्रक्रिया, यदि आरोप सत्य हैं, तो स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक पारदर्शिता का सीधा उल्लंघन है। प्रशासनिक हल्कों में दबी जुबान में यह चर्चा है कि इस तरह के अटैचमेंट का उद्देश्य केवल कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाना है, जिससे विभाग के नैतिक बल और कार्य संस्कृति को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।
अगला कदम: क्या होगी कड़ी कार्रवाई?
यह मामला बिलासपुर कृषि विभाग में एक बड़ा विवाद बन चुका है, जिसने प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब गेंद उच्चाधिकारियों के पाले में है। मांग की जा रही है कि:
* संयुक्त संचालक मनोज चौहान के कार्यकाल में किए गए सभी अटैचमेंट की तत्काल निष्पक्ष जांच हो।
* विवादास्पद अटैचमेंट को तुरंत रद्द किया जाए।
* किसानों के हित में, कर्मचारियों को उनके मूल या आवश्यक पदों पर तत्काल तैनात किया जाए।
संभाग के किसान और जनप्रतिनिधि अब सरकार से इस ‘अटैचमेंट राज’ को खत्म कर कृषि विभाग को पटरी पर लाने के लिए कड़ी कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

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