चांपा स्टेशन पर ‘जहरीली’ प्यास: बोतल में मिली काई, शिकायत करने पर कंपनी ने उपभोक्ता से की बदसलूकी

चांपा स्टेशन पर ‘जहरीली’ प्यास: बोतल में मिली काई, शिकायत करने पर कंपनी ने उपभोक्ता से की बदसलूकी


चांपा/बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के चांपा स्टेशन पर यात्रियों की सेहत के साथ खिलवाड़ का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर बिक रही ‘O2 Drops‘ ब्रांड की सीलबंद पानी की बोतल में ‘काई’ (फंगल) तैरती मिली। जब जागरूक उपभोक्ता ने इसकी शिकायत की, तो समाधान के बजाय कंपनी के कर्मचारियों द्वारा बदसलूकी और फोन पर धमकियां देने का मामला सामने आया है।

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दुकानदार का पक्ष: “कार्टन से निकालकर दी थी बोतल”


स्टेशन पर कैंटीन संचालक शौकत अली ने बताया कि भीड़ के दौरान उन्होंने नियमानुसार ‘ब्लू इरा सोल्यूशन‘ मैन रोड जगमल चौक(बिलासपुर) से प्राप्त कार्टन में से बोतल निकालकर ग्राहक को दी थी और उसका पक्का बिल भी दिया था। संचालक के अनुसार, “जैसे ही शिकायत मिली, मैंने ग्राहक से बोतल बदलकर दूसरी बोतल लेने का आग्रह किया था, लेकिन वे उचित कार्रवाई की बात कहकर चले गए।”


कंपनी का गैर-जिम्मेदाराना रवैया और बदसलूकी


मामले ने तूल तब पकड़ा जब उपभोक्ता ने बोतल पर छपे कस्टमर केयर नंबर पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के कुछ ही देर बाद उपभोक्ता के पास अलग-अलग नंबरों से फोन आने लगे। खुद को कंपनी का कर्मचारी बताने वाले इन लोगों ने गलती सुधारने के बजाय उपभोक्ता के साथ अभद्र व्यवहार (दुर्व्यवहार) किया।


मीडिया का हस्तक्षेप और अधिकारियों की चुप्पी


उपभोक्ता की शिकायत पर जब मीडिया कर्मियों ने मामले की पड़ताल की, तो सीलबंद बोतल के भीतर फंगल (काई) होने की स्पष्ट पुष्टि हुई।


  मीडिया की कोशिश: जब मीडिया ने कंपनी के कस्टमर केयर से संपर्क किया, तो उन्हें एक जनरल मैनेजर (GM) का नंबर दिया गया।
* टालमटोल: शुरुआती बातचीत में जीएम ने मीडिया को “आकर मिलने” की बात कही।


  संपर्क से दूरी: इसके बाद जब मीडिया ने दोबारा उनका पक्ष (Version) जानने के लिए फोन लगाया, तो जीएम ने फोन उठाना बंद कर दिया, जो कंपनी की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


रेलवे प्रशासन ने भी झाड़ा पल्ला


हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर जब रेलवे के CI (कमर्शियल इंस्पेक्टर) से बात की गई, तो उन्होंने कोई ठोस जवाब देने के बजाय मामले को PRO के पाले में डाल दिया।
> सवालिया निशान: > 1. क्या रेलवे प्रशासन और कंपनी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
> 2. जिस पानी की बोतल पर निर्माण तिथि 20.01.26 और एक्सपायरी 19.06.26 दर्ज है, वह समय से पहले ‘जहरीली’ कैसे हो गई?
> 3. क्या बिलासपुर स्थित इस कंपनी के प्लांट की कभी गुणवत्ता जांच की जाती है?
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कार्रवाई की मांग: इस मामले में उपभोक्ता अब खाद्य सुरक्षा विभाग और रेलवे बोर्ड को साक्ष्यों (बिल और दूषित बोतल) के साथ औपचारिक शिकायत करने की तैयारी में है, ताकि यात्रियों की जान से खेलने वाली इस कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।

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