मुख्तिधाम के अभाव में अस्थायी तंबू तानकर किया गया आदिवासी महिला का अंतिम संस्कार,

मुख्तिधाम के अभाव में अस्थायी तंबू तानकर किया गया आदिवासी महिला का अंतिम संस्कार, एक दिन तक शव घर में रखने पर हुए मजबूर,

img 20250703 wa00065450631368436364361 Console Corptech
img 20250703 wa00076501471289186962374 Console Corptech

जांजगीर-चांपा। जिले के अकलतरा ब्लॉक के आदिवासी बहुल इलाका बाना-परसाही गांव से प्रशासनिक लापरवाही का एक और मामला सामने आया है। गांव में मुक्तिधाम (श्मशान घाट) की सुविधा नहीं होने के कारण एक आदिवासी महिला का अंतिम संस्कार अस्थायी तंबू तानकर करना पड़ा। बारिश के चलते परिजन शव को एक दिन तक घर में ही रखने पर मजबूर हो गए थे।
दरसअल इस घटना ने ग्राम स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी की पोल खोल दी है। महिला की मौत के बाद परिजन उसका अंतिम संस्कार करना तो चाह रहे थे, लेकिन लगातार बारिश और मुख्तिधाम के अभाव में कोई उचित स्थान नहीं मिलने के कारण वे असमंजस में रहे। अंततः अगली सुबह परिजनों ने गांव के बाहर एक ऊंचे स्थान पर प्लास्टिक की पन्नी और लोहे की टिन से अस्थायी तंबू बनाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की।ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्षों से श्मशान घाट निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र स्थायी मुख्तिधाम निर्माण की मांग की है ताकि भविष्य में किसी और को इस प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यह पहला मामला नहीं है इसके पूर्व भी इस तरह के कई मामले सामने आए हैं इसके बावजूद भी प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा स्थानीय ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

Back to top button