मुख्यमंत्री का आगमन, लेकिन सभा स्थल पर खाली कुर्सियां! शिवरीनारायण महोत्सव में कम भीड़ ने खड़े किए सवाल

मुख्यमंत्री का आगमन, लेकिन सभा स्थल पर खाली कुर्सियां! शिवरीनारायण महोत्सव में कम भीड़ ने खड़े किए सवाल

क्या स्थानीय लोगों का महोत्सव से मोहभंग हो रहा है, या आयोजन के पीछे कोई और वजह? मुख्यमंत्री और दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के बीच खाली कुर्सियों की चर्चा।

जांजगीर चांपा। शिवरीनारायण माता शबरी की पावन धरती शिवरीनारायण में आयोजित तीन दिवसीय शिवरीनारायण महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम में उस वक्त चर्चा का विषय बन गया, जब प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उनकी पत्नी कौशल्या देवी साय, वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित प्रदेश और जिले के कई प्रमुख नेता कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, लेकिन सभा स्थल पर अपेक्षित जनसमूह नजर नहीं आया। मुख्यमंत्री के आगमन और दूसरी ओर खाली पड़ी कुर्सियों के इस दृश्य ने आयोजन की जनभागीदारी को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए।

शिवरीनारायण महोत्सव धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण आयोजन माना जाता है। ऐसे में प्रदेश के मुखिया और कई बड़े जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद सभा स्थल पर कम भीड़ दिखाई देना चर्चा का विषय बन गया। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिस महोत्सव को भव्य रूप देने की तैयारी की गई, उसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी अपेक्षा के अनुरूप क्यों नजर नहीं आई?

स्थानीय लोगों का मोहभंग या आयोजन में कमी?

महोत्सव के शुभारंभ के दौरान दिखाई दिए इस दृश्य ने कई सवालों को जन्म दिया है। क्या स्थानीय लोगों में महोत्सव को लेकर पहले जैसा उत्साह नहीं रहा? क्या आयोजन के प्रचार-प्रसार में कमी रह गई, या फिर कार्यक्रम की रूपरेखा और समय को लेकर लोगों में अपेक्षित जानकारी नहीं पहुंच सकी? इन सवालों का जवाब आयोजकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को तलाशना होगा।

राजनीति की भेंट चढ़ा महोत्सव या कुछ और है वजह?

एक ओर मंच पर मुख्यमंत्री सहित दिग्गज नेताओं की मौजूदगी रही, तो दूसरी ओर खाली कुर्सियों का दृश्य आयोजन की सफलता और जनभागीदारी पर सवाल खड़े करता नजर आया। ऐसे में यह चर्चा भी सामने आ रही है कि कहीं महोत्सव राजनीतिक गतिविधियों तक ही सीमित होकर तो नहीं रह गया? हालांकि, इसके पीछे किसी राजनीतिक कारण को जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त तथ्य सामने आना जरूरी है।

गौरतलब है कि शिवरीनारायण महोत्सव का आयोजन 14 से 16 अक्टूबर तक किया जा रहा है। ऐसे में शुरुआती कार्यक्रम में कम भीड़ नजर आने के कारणों को समझना जरूरी है। साथ ही यह भी देखना होगा कि आगामी दिनों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और अन्य आयोजनों के दौरान लोगों की भागीदारी कैसी रहती है।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है—मुख्यमंत्री का आगमन और दिग्गज नेताओं की मौजूदगी भी यदि सभा स्थल को पूरी तरह नहीं भर सकी, तो इसकी वजह क्या रही? क्या यह केवल शुरुआती कार्यक्रम में कम उपस्थिति का मामला है, या आयोजकों को जनभागीदारी बढ़ाने के लिए अपनी रणनीति पर दोबारा विचार करने की जरूरत है? इसका जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकता है।

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