




400–500 फीट गहरे गड्ढों में राखड़ भराव से जनस्वास्थ्य पर खतरा, बिरगहनी चांपा में भूजल जांच शुरू
चांपा (जिला जांजगीर-चांपा)। ग्राम पंचायत बिरगहनी चांपा एवं आसपास के क्षेत्रों में संभावित भूजल प्रदूषण और जनस्वास्थ्य संकट को लेकर प्रशासन हरकत में आया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड/भूजल विभाग की टीम ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर पांच अलग-अलग हैंडपंप और बोरवेल से पानी के नमूने एकत्र किए। अधिकारियों ने बताया कि जांच रिपोर्ट लगभग एक सप्ताह में प्राप्त होने की संभावना है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों ने जांच टीम के समक्ष गंभीर आरोप लगाए हैं कि क्षेत्र में संचालित कुछ क्रेशर उद्योगों द्वारा 400 से 500 फीट तक गहराई में उत्खनन किया गया। उत्खनन के बाद बने गहरे गड्ढों में कथित रूप से थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली फ्लाई ऐश (राखड़) का भराव किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि बिना वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों—जैसे एचडीपीई लाइनिंग—के राखड़ डाली जा रही है, तो भारी धातुओं के भूजल में रिसाव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
संभावित खतरे
विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थिति में कई गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं—
पेयजल में विषैले तत्वों की मिलावट
कैंसर, किडनी एवं त्वचा रोगों का खतरा
कृषि भूमि की उर्वरता में गिरावट
पशुधन एवं जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव
गांव के अधिकांश परिवार पेयजल और सिंचाई के लिए भूजल स्रोतों पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि प्रदूषण की पुष्टि होती है, तो यह मामला सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर माना जाएगा।
निरीक्षण के दौरान उपस्थिति
जांच के दौरान आरटीआई एवं सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा, ग्राम पंचायत के सरपंच सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
विकास शर्मा ने कहा कि यदि जांच में प्रदूषण सिद्ध होता है, तो संबंधित उद्योगों और जिम्मेदार अधिकारियों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्न मांगें रखी हैं—
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
गहरे उत्खनन स्थलों की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए
नियम विरुद्ध भराव कार्य तत्काल रोका जाए
नियमित भूजल मॉनिटरिंग एवं स्वास्थ्य सर्वे शुरू किया जाए
फिलहाल पूरे मामले में जांच रिपोर्ट का इंतजार है। प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर ग्रामीणों की नजरें टिकी हुई हैं।




