चाम्पाछत्तीसगढ़जांजगीरजांजगीर चांपा,देशभक्तिपुलिसबिलासपुरमानवतारायपुरशिक्षासक्ती

फौजी भाइयों के लिए मिट्टी, गोबर और बीज से तैयार हो रही अनूठी राखी

फौजी भाइयों के लिए मिट्टी, गोबर और बीज से तैयार हो रही अनूठी राखी

चार साल से सीमा पर तैनात जवानों तक पहुंचा रही हैं चांपा की नेहा अग्रवाल, राखी के साथ भेजेंगी तिलक की मिट्टी

चांपा। रक्षाबंधन पर्व को लेकर जांजगीर-चांपा जिले में तैयारियां शुरू हो गई हैं। बाजार रंग-बिरंगी राखियों से सज गए हैं और बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र की कामना के लिए राखियों की खरीदारी कर रही हैं। इसी बीच चांपा की समाजसेवी महिला नेहा अविनाश अग्रवाल पिछले चार वर्षों से सीमा पर देश की रक्षा में तैनात जवानों के लिए विशेष राखियां तैयार कर रही हैं। इस बार इन राखियों को मिट्टी, गोबर और विभिन्न फल-फूलों के बीज से तैयार किया जा रहा है। राखियों के साथ जवानों के लिए तिलक लगाने मिट्टी भी भेजने की तैयारी है।

नेहा अविनाश अग्रवाल मारवाड़ी महिला समिति के माध्यम से लगातार सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहती हैं। उन्होंने चार वर्ष पहले सीमा पर तैनात फौजी भाइयों के लिए रक्षाबंधन पर राखियां भेजने की पहल शुरू की थी। इस वर्ष भी वे अपनी महिला सहेलियों और बच्चों के साथ मिलकर जवानों के लिए राखियां तैयार कर रही हैं। राखियों को तिरंगे की पट्टी से सजाया जा रहा है और मिट्टी व गोबर के साथ फल-फूलों के बीज मिलाकर इन्हें विशेष स्वरूप दिया जा रहा है।

राखी के बाद गमले में उगेगा पौधा

नेहा अग्रवाल का कहना है कि देश की मिट्टी से जवानों का विशेष भावनात्मक लगाव होता है। भारत माता की रक्षा के लिए जवान हर मौसम में सीमा पर तैनात रहते हैं और कई बार त्योहारों पर भी अपने परिवार से दूर रहते हैं। ऐसे में उन्हें रक्षाबंधन की खुशी और अपनापन महसूस कराने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।

विशेष राखियों को भारत के नक्शे के स्वरूप में तैयार कर तिरंगे की फीते से सजाया जा रहा है। मिट्टी और गोबर के साथ राखी में नींबू, संतरा, पीपल, बरगद, नीम, तुलसी और गेंदे सहित विभिन्न फल-फूलों के बीज डाले जा रहे हैं। राखी बांधने के बाद इसमें मौजूद बीजों को गमले की मिट्टी में डालकर पानी देने पर इनके अंकुरित होने और पौधे के रूप में विकसित होने की उम्मीद है।

घर के फलों के बीजों का भी हो रहा सदुपयोग

नेहा अग्रवाल बताती हैं कि उनके घर में आने वाले फलों और फूलों के बीजों को वे फेंकने के बजाय एकत्र करती हैं। इन्हीं बीजों का उपयोग अब फौजी भाइयों के लिए तैयार की जा रही राखियों में किया जा रहा है। उनका उद्देश्य रक्षाबंधन की खुशियां जवानों तक पहुंचाने के साथ-साथ उन्हें पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करना भी है।

राखी के माध्यम से देश की सीमा पर तैनात जवानों के प्रति सम्मान, भाई-बहन के रिश्ते की भावना और पर्यावरण संरक्षण का संदेश एक साथ देने की यह पहल क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

Back to top button