अभूतपूर्व: 1000 वर्षों बाद जांजगीर में होंगे उस ‘दिव्य सोमनाथ शिवलिंग’ के दर्शन, जिसे गजनी भी नष्ट नहीं कर सका

अभूतपूर्व: 1000 वर्षों बाद जांजगीर में होंगे उस ‘दिव्य सोमनाथ शिवलिंग’ के दर्शन, जिसे गजनी भी नष्ट नहीं कर सका
जांजगीर-चांपा: छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर एक ऐसी आध्यात्मिक घटना घटने जा रही है, जो सदियों के इतिहास को जीवंत कर देगी। आगामी 25 अप्रैल 2026 को जांजगीर के रानी सती दादी मंदिर में उन पवित्र अवशेषों के दर्शन होंगे, जिनका संबंध सोमनाथ मंदिर पर हुए ऐतिहासिक आक्रमण और एक प्राचीन भविष्यवाणी से है।
इतिहास के पन्नों से: हवा में तैरते शिवलिंग की गाथा
इतिहास के अनुसार, आज से लगभग 1000 साल पहले जब महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था, तब वहां का मुख्य शिवलिंग चुंबकीय शक्ति के कारण हवा में स्थापित था। आक्रमण के दौरान जब उस दिव्य शिवलिंग को क्षति पहुँचाई गई, तो उसके अवशेष बिखर गए थे।
मान्यता है कि उन पवित्र टुकड़ों को दक्षिण भारत के अग्निहोत्री ब्राह्मणों ने अत्यंत गोपनीयता और श्रद्धा के साथ संजो कर रखा। पीढ़ी दर पीढ़ी, सदियों तक इन अवशेषों की पूजा अर्चना उसी निष्ठा के साथ की जाती रही, मानो वे मूल ज्योतिर्लिंग का ही स्वरूप हों।
प्राचीन भविष्यवाणी और श्री श्री रवि शंकर जी
इस घटना के साथ एक चमत्कारिक भविष्यवाणी भी जुड़ी है। कहा जाता है कि तत्कालीन शंकराचार्य जी ने यह संकेत दिया था कि भविष्य में जब देश स्वतंत्र होगा और अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर की स्थापना हो जाएगी, तब दक्षिण भारत में ‘शंकर’ नाम के एक महान संत का प्रादुर्भाव होगा। यह पवित्र शिवलिंग उन्हीं को सौंपा जाना था।
इसी कड़ी में, कुछ समय पूर्व दक्षिण भारत के उन परिवारों ने यह प्राचीन शिवलिंग ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के संस्थापक श्री श्री रवि शंकर जी को सौंप दिया। गुरुदेव ने संकल्प लिया है कि इन पवित्र अवशेषों को पुनः सोमनाथ की पावन भूमि पर ससम्मान स्थापित किया जाएगा। इसी संकल्प के तहत, वर्तमान में यह दिव्य शिवलिंग पूरे देश के भ्रमण पर है, ताकि जन-मानस इसके दर्शन कर सके।
जांजगीर में ‘वास्तविक दर्शन’ का सौभाग्य
यह केवल एक प्रतिमा का दर्शन नहीं, बल्कि उस ऊर्जा का साक्षात अनुभव है जिसने 1000 वर्षों का कालखंड देखा है। आर्ट ऑफ लिविंग परिवार जांजगीर-चांपा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को निम्नलिखित लाभ मिलेंगे:
वास्तविक दर्शन: श्रद्धालु उस प्राचीन शिवलिंग के दर्शन कर पाएंगे जिसे सदियों तक गुप्त रूप से पूजा गया।
ऐतिहासिक पल: यह आयोजन जांजगीर के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा, जहाँ प्रत्यक्ष रूप से सोमनाथ की प्राचीन विरासत मौजूद होगी।
सामूहिक आराधना: शाम 6:00 बजे से होने वाली विशेष पूजा में सभी भक्त सम्मिलित होकर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम विवरण:
दिनांक: 25 अप्रैल 2026, शनिवार
समय: संध्या 6:00 बजे से 8 बजे तक
स्थान: रानी सती दादी मंदिर, जांजगीर
संपर्क: 94076 05783
आयोजकों का संदेश:
आर्ट ऑफ लिविंग परिवार ने क्षेत्र के समस्त नागरिकों, धर्मप्रेमियों और शिवभक्तों से सपरिवार इस ऐतिहासिक और दिव्य अवसर का साक्षी बनने की अपील की है। 1000 साल पुराने इस इतिहास और श्रद्धा के संगम में उपस्थिति अनिवार्य है।

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