



पिसौद धान केंद्र से आ रहा बड़ा मामला
अधिकारियों की लापरवाही से किसान परेशान, सरकार के दावे सवालों के घेरे में
जांजगीर-चांपा।
सेवा सहकारिता समिति पीसौद से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 3 एकड़ में पंजीकृत एक किसान सरकारी तंत्र की लापरवाही और अधिकारियों की मनमानी का शिकार हो गया है। यह मामला सरकार द्वारा किए जा रहे “दाने-दाने की खरीद” के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
पीसौद धान केंद्र में पंजीकृत किसान मांगतीन बाई बीते एक महीने से धान बेचने के लिए मंडी और अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। किसान परिवार का कहना है कि अधिकारियों द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज समय पर जमा कर दिए गए हैं, इसके बावजूद अब तक धान की खरीदी नहीं हो पाई है।
किसान के पोते विश्वनाथ ने बताया कि वे पिछले एक माह से लगातार मंडी और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं। अधिकारियों के निर्देशानुसार सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसानों के दस्तावेजों को नजरअंदाज कर दिया गया हो।
जब इस संबंध में नायब तहसीलदार श्रीजल साहू से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि वे “ऊपर से मिले निर्देशों” के अनुसार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में उनके कार्यालय में लगभग 70 किसानों के दस्तावेज लंबित हैं और शासन से नए निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। 16 जनवरी से दस्तावेज जमा होने के बावजूद कार्यवाही नहीं होने के सवाल पर भी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।
किसान मांगतीन बाई और उनके परिजनों ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि सरकार उनका धान नहीं खरीदती है तो उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। परिवार ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में उनके पास कोई विकल्प नहीं बचेगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या शासन और प्रशासन समय रहते किसान का धान खरीदेगा या फिर किसानों को असहाय हालात में छोड़ दिया जाएगा।




