सरकारी आदेशों के कार्यवाही पर अमल नहीं, समिति की मनमानी से किसानों में आक्रोश

आज अधिकारयों द्वारा की गई पत्राचार

24 जनवरी की कार्यवाही पर अमल नहीं, समिति की मनमानी से किसानों में आक्रोश

जांजगीर चांपा


धुरकोट मंडी
24 जनवरी को जारी सरकारी आदेशों का पालन न होने से सेवा सहकारी समिति धुरकोट एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मंडी में फैली अव्यवस्था और समिति की कथित मनमानी को लेकर किसानों में लगातार आक्रोश पनप रहा है।
आरोप है कि समिति के अध्यक्ष रामेश्वर लाल कश्यप ने सरकारी दिशा-निर्देशों को दरकिनार करते हुए अपने चहेते राम प्रहलाद कश्यप को खरीदी प्रभारी एवं प्रबंधक बना दिया, जबकि शासन के निर्देशानुसार इस पद के लिए समिति के वरिष्ठ सदस्य एवं कंप्यूटर ऑपरेटर अभिषेक सिंह का नाम प्रस्तावित किया गया था।
सरकारी आदेशों के अनुसार 24 जनवरी को ही अभिषेक सिंह की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन आदेश जारी हुए पांच दिन बीत जाने के बाद भी उन्हें प्रभार नहीं दिया गया। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिर समिति सरकारी आदेशों की अनदेखी क्यों कर रही है।
सूत्रों की मानें तो 24 जनवरी को समिति द्वारा अलग-अलग लिखित कार्यवाहियों के माध्यम से दो अलग-अलग लोगों को प्रभार दे दिया गया। जब यह मामला अधिकारियों तक पहुंचा तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए हस्तक्षेप किया और सरकारी आदेशों के पालन के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति की।
हालांकि, बाजार में यह चर्चा भी तेज हो गई कि नियुक्त अधिकारी और समिति के सदस्यों के बीच कथित साठगांठ की “गंध” फैलने लगी, जिसके बाद उच्च अधिकारियों ने उनसे भी स्पष्टीकरण तलब किया। बताया जा रहा है कि नियुक्त अधिकारी नवागढ़ के सहकारिता विस्तार अधिकारी सुशील सूर्यवंशी हैं।
मामला यहीं नहीं रुका। सहकारिता विभाग द्वारा 28 जनवरी को पुनः पत्राचार करते हुए समिति अध्यक्ष को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि अनैतिक तरीके से दो लोगों को प्रभार देना गलत है और इस त्रुटि को सुधारते हुए समिति के वरिष्ठ कर्मचारी एवं वर्तमान कंप्यूटर ऑपरेटर अभिषेक सिंह को ही पदभार सौंपा जाए।


अब बड़ा सवाल यह है कि क्या समिति इस सरकारी आदेश का पालन करेगी या फिर आदेशों की अवहेलना कर किसानों को यूं ही परेशान करती रहेगी। लगातार हो रही इस खींचतान से समिति के भीतर असंतोष की स्थिति बनती जा रही है, जिसका खामियाजा आने वाले समय में समिति को भारी नुकसान के रूप में भुगतना पड़ सकता है।

अधिकारी की मनमानी पर शासन ने मांगा स्पष्टीकरण

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