कलेक्टर के सफाई अभियान पर मछली ठेकेदार ने फेरा पानी, तालाब के भीतर ही लगा दिया जलकुंभी का ढेर

कलेक्टर के सफाई अभियान पर मछली ठेकेदार ने फेरा पानी, तालाब के भीतर ही लगा दिया जलकुंभी का ढेर

चांपा। दो माह पूर्व जिला प्रशासन की पहल पर जांजगीर-चांपा कलेक्टर के नेतृत्व में नगरपालिका द्वारा जनप्रतिनिधियों और नागरिकों की उपस्थिति में रामबांधा तालाब सफाई अभियान की शुरुआत की गई थी। पूजा-अर्चना के साथ शुरू हुए इस अभियान को लेकर लोगों में काफी उत्साह था और उम्मीद जताई जा रही थी कि तालाब की सफाई के बाद उसका सौंदर्य और उपयोगिता दोनों बढ़ेंगे।

हालांकि लाखों रुपये खर्च कर घाटों से बड़ी मात्रा में जलकुंभी निकाली गई, लेकिन प्राकृतिक कारणों और उचित निस्तारण नहीं होने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। इस बीच अब मछली पालन ठेकेदार की कार्यप्रणाली को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार ठेकेदार ने तालाब के बीच हिस्से से जलकुंभी हटाकर मछली पकड़ने के लिए जाल बिछाया, लेकिन निकाली गई जलकुंभी और कचरे को तालाब से बाहर ले जाने के बजाय तालाब के अंदर ही एक स्थान पर ढेर कर दिया। इससे जहां सफाई अभियान की मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है, वहीं बरसात के मौसम में यह सड़ी-गली जलकुंभी तालाब के पानी को प्रदूषित करने का कारण भी बन सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब ठेकेदार द्वारा जाल बिछाया जा रहा था, तब नागरिकों ने उसे जलकुंभी को तालाब से बाहर निकालने की सलाह दी थी। इस पर ठेकेदार ने बाद में हटाने का आश्वासन दिया, लेकिन फिलहाल केवल मछली पकड़ने का कार्य किया गया। अब शासन के नियमों के अनुसार 15 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू होने के कारण आशंका जताई जा रही है कि तालाब के भीतर जमा जलकुंभी का ढेर लंबे समय तक वहीं पड़ा रह सकता है।

ठेकेदार पर कार्रवाई की उठी मांग

राम बांधा तालाब नगरवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण बारहमासी जलस्रोत है। ऐसे में नागरिकों का कहना है कि यदि तालाब में मछली पालन का ठेका दिया गया है तो उसकी साफ-सफाई और संरक्षण की जिम्मेदारी भी संबंधित ठेकेदार की तय होनी चाहिए। नगरपालिका और ठेकेदार के बीच हुए अनुबंध की शर्तें सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन यदि सफाई की जिम्मेदारी ठेकेदार की है और वह केवल मछली उत्पादन से लाभ कमाने तक सीमित है, तो यह जनहित के विपरीत माना जाएगा।

तालाब की बदहाल स्थिति से पहले से परेशान नागरिकों ने तालाब के भीतर जलकुंभी का ढेर लगाने वाले मछली ठेकेदार के खिलाफ जांच और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें जिला प्रशासन और नगरपालिका पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या कदम उठाए जाते हैं और राम बांधा तालाब को प्रदूषण से बचाने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

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