
नवापारा रेत घाट में अवैध खनन का ‘खेल’, करोड़ों के नुकसान पर प्रशासन सवालों के घेरे में
जांजगीर-चांपा। जिले के नवापारा स्थित हसदेव नदी के रेत घाटों पर अवैध उत्खनन का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि रेत माफिया रात के अंधेरे में मशीनों और भारी वाहनों की मदद से बड़े पैमाने पर रेत निकालकर नदी किनारे ही डंप कर रहे हैं और फिर अन्य जिलों में खपा रहे हैं। इस अवैध कारोबार से शासन को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
मामले में राजनीतिक रंग भी गहराता नजर आ रहा है। आरोप है कि एक भाजपा नेता इस अवैध उत्खनन में संलिप्त है और खुद को “मंत्री का करीबी” बताकर दबाव बनाते हुए रेत निकासी करवा रहा है। पट्टा धारकों को धमकाने और मनमानी करने के आरोप भी सामने आ रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
वर्चस्व की लड़ाई में तनाव
सूत्रों के मुताबिक, नवापारा रेत घाट पर वर्चस्व को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि पिस्तौल तक निकलने की नौबत आ गई। वहीं अलग-अलग स्थानों पर 2 से 3 करोड़ रुपए तक की अवैध रेत डंप कर दी गई है। इसके बावजूद माफियाओं पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
विधायक और मीडिया ने उठाए सवाल
हाल ही में जांजगीर-चांपा विधानसभा के कांग्रेस विधायक द्वारा कलेक्टर जनमेजय महोबे को अवैध उत्खनन के वीडियो सौंपे गए थे। मीडिया ने भी रेत डंपिंग और अवैध खनन को लेकर लगातार सवाल उठाए। इसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग ने छापेमारी कर करोड़ों की रेत जब्त की और आंशिक रूप से नदी में वापस डलवाई, लेकिन अधिकांश रेत को मौके पर ही छोड़ दिए जाने से कार्रवाई की गंभीरता पर संदेह बना हुआ है।
प्रशासन ने गिनाए कार्रवाई के आंकड़े
इधर प्रशासन अपने बचाव में कार्रवाई के आंकड़े पेश कर रहा है। खनिज विभाग के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के 612 प्रकरण दर्ज कर 1 करोड़ 74 लाख 19 हजार 220 रुपये की वसूली की गई है। वहीं, बीते दो माह में विशेष अभियान के तहत 50 प्रकरण दर्ज कर 16 लाख 73 हजार 176 रुपये वसूले गए हैं।
अवैध उत्खनन बर्दाश्त नहीं—प्रशासन
प्रशासन का कहना है कि छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियमावली 2015 और खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है और अवैध खनिज गतिविधियों को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जमीनी हकीकत पर उठते सवाल
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब कार्रवाई के इतने बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो नवापारा जैसे क्षेत्रों में अवैध उत्खनन पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही है। अधिकारी दावों से अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कब तक प्रभावी और ठोस कार्रवाई करता है या फिर रेत माफियाओं का यह खेल यूं ही जारी रहेगा।



