





श्रीमद् भगवत गीता सार ‘सुखद जीवन का आधार’ ज्ञान यज्ञ का तीसरा दिन संपन्न
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय निरंतर सामाजिक उत्थान का कार्य कर रही है : नारायण चंदेल
आत्मा सतोगुणी है, जिसमें सुख-शांति, प्रेम, आनंद, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता समाहित है : शशिप्रभा दीदी
चांपा। चांपा में आयोजित श्रीमद् भगवत गीता सार – सुखद जीवन का आधार ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय नारायण चंदेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े हुए हैं। उन्हें संस्था के मुख्यालय माउंट आबू जाने का भी सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्था संपूर्ण विश्व में आध्यात्मिक ज्ञान और सामाजिक चेतना के माध्यम से जन-जागृति फैलाने का कार्य कर रही है तथा समाज को एक नई दिशा प्रदान कर रही है। कार्यक्रम के आयोजक श्री लक्ष्मी चंद देवांगन एवं श्रीमती उमा देवांगन द्वारा अतिथि का आत्मीय अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए ब्रह्माकुमारी शशिप्रभा दीदी ने कहा कि आत्मा सतोगुणी होती है, जिसमें सुख, शांति, प्रेम, आनंद, ज्ञान, शक्ति और पवित्रता जैसे दिव्य गुण समाहित हैं। यही आत्मा पंचतत्वों से बने इस विशाल शरीर को संचालित करती है। इन गुणों के माध्यम से आत्मा सत्कर्म कर पुण्य आत्मा बनती है।
उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान कलियुगी वातावरण के प्रभाव में आत्मा अपने मूल सतोगुणों को भूल गई है, जिसके कारण विकर्म और पापकर्म बढ़ रहे हैं। ऐसे समय में गीता ज्ञान ही एकमात्र माध्यम है, जो आत्मा की सोई हुई शक्तियों को जागृत कर सकता है। दीदी ने कर्म, अकर्म और विकर्म की गहन गति को भी विस्तारपूर्वक समझाया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहकर गीता ज्ञान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।




