हरी खाद के उपयोग से खेती में होगा लाभ



जांजगीर-चांपा। कृषि विभाग द्वारा किसानों को खेती में हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि धान के खेतों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी की संरचना खराब हो रही है और लाभदायक सूक्ष्मजीवों की सक्रियता भी कम होती जा रही है।

इस समस्या के समाधान के लिए किसानों को हरी खाद के रूप में सन, ढैंचा (ढेचा), मूंग, उड़द और लोबिया जैसी दलहनी फसलें उगाने की सलाह दी जा रही है। हरी खाद के उपयोग से लगभग 25 से 40 प्रतिशत तक पोषक तत्वों की पूर्ति संभव है।

👉 ऐसे करें हरी खाद का उपयोग

हरी खाद वाली फसलों की बुवाई धान रोपाई से 45-50 दिन पहले करें

बुवाई के 40-45 दिन बाद, फूल/फल आने से पहले फसल को खेत में मिला दें

प्रति एकड़ 30-40 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है

धान रोपाई से 5-7 दिन पूर्व खेत की मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें


👉 हरी खाद के प्रमुख फायदे

मिट्टी में जैविक पदार्थ (ऑर्गेनिक मैटर) की वृद्धि

वातावरण से नाइट्रोजन स्थिरीकरण

मिट्टी की निचली परतों से फास्फोरस एवं पोटाश का बेहतर अवशोषण

मिट्टी की उर्वरता और संरचना में सुधार

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी


कृषि विभाग द्वारा खरीफ सीजन से पहले हरी खाद के लिए बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने का भी प्रयास किया जा रहा है।

उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने किसानों से अपील की है कि वे हरी खाद को अपनाकर अपनी मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करें और टिकाऊ खेती की दिशा में कदम बढ़ाएं।

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