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बच्ची की मौत के बाद जागा जनआक्रोश, बर्न यूनिट की मांग को लेकर अनोखा विरोध

बच्ची की मौत के बाद जागा जनआक्रोश, बर्न यूनिट की मांग को लेकर अनोखा विरोध

पत्रकार कृष्णा टंडन के साथ स्थानीय लोगों ने चलाया जनसहयोग अभियान, चंदे से जुटाए ₹5,925

जांजगीर-चांपा। जिले के चांपा क्षेत्र से ग्राम कोसमंदा निवासी 5 वर्षीय मासूम रियांशी की मौत के बाद जांजगीर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लोगों का आक्रोश सामने आने लगा है। जिला अस्पताल में बर्न यूनिट की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर पत्रकार कृष्णा टंडन के साथ स्थानीय लोगों ने अनोखे तरीके से विरोध जताते हुए जनसहयोग अभियान चलाया।

आक्रोशितों ने जिला अस्पताल के सामने पहुंचकर लोगों से सहयोग की अपील की। उनका कहना था कि जिले में लंबे समय से बर्न यूनिट की जरूरत महसूस की जा रही है। रियांशी के मामले के बाद यह मांग और भी गंभीर हो गई है। अभियान के दौरान लोगों से मिले सहयोग से ₹5,925 की राशि एकत्रित की गई, जिसे बाद में जिला अस्पताल में संचालित जीवनदीप समिति को सौंपा गया और समिति द्वारा इसकी पावती भी प्रदान की गई।

आखिर बर्न यूनिट होता क्या है?

बर्न यूनिट अस्पताल का वह विशेष चिकित्सा विभाग होता है, जहां आग, गर्म पानी, गर्म तेल, बिजली या रसायन से झुलसे मरीजों का विशेष उपचार किया जाता है। यहां गंभीर रूप से जले मरीजों के लिए अलग वार्ड, प्रशिक्षित चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ, घाव की ड्रेसिंग, संक्रमण से बचाव, दर्द नियंत्रण, तरल पदार्थ एवं अन्य आवश्यक उपचार की व्यवस्था होती है।

गंभीर मामलों में मरीज को ऑपरेशन, स्किन ग्राफ्टिंग, आईसीयू या अन्य विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता भी पड़ सकती है। खासकर बच्चों और शरीर के बड़े हिस्से के जलने वाले मरीजों के लिए समय पर उचित उपचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। बर्न यूनिट का उद्देश्य ऐसे मरीजों को तत्काल और विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना होता है, ताकि उनकी स्थिति बिगड़ने से रोकी जा सके।

तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर स्वीकार किया ज्ञापन

मामले की जानकारी मिलने पर जांजगीर तहसीलदार शशि भूषण सोनी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशितों से चर्चा की और उनकी मांगों को सुना। इसके बाद मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया ज्ञापन स्वीकार किया गया।

तहसीलदार ने नागरिकों की ओर से उठाई गई बर्न यूनिट की मांग को जायज बताया। उन्होंने कहा कि नागरिकों की मांग एवं अस्पताल से संबंधित अन्य शिकायतों को शासन के संज्ञान में लाया गया है, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके और जिला अस्पताल में बर्न यूनिट की सुविधा शुरू करने की दिशा में पहल हो।

मौके पर कोतवाली थाना प्रभारी जय प्रकाश गुप्ता सहित पुलिस टीम एवं प्रशासनिक अमला भी मौजूद रहा।

रियांशी की मौत के बाद बड़ा सवाल

रियांशी की मौत ने जिला अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के उपचार की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला अस्पताल में ही सुसज्जित और पूरी तरह संचालित बर्न यूनिट हो तो गंभीर रूप से झुलसे मरीजों को तत्काल उपचार मिल सकेगा और जरूरत पड़ने पर समय रहते विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा।

अब देखना यह होगा कि रियांशी की मौत के बाद उठी जनआवाज और बर्न यूनिट की मांग कब तक रंग लाती है। क्या प्रशासन और शासन इस मांग पर गंभीरता से पहल करते हुए जिला अस्पताल में बर्न यूनिट को जल्द शुरू कराएगा, या फिर यह मांग भी वर्षों से चली आ रही मांगों की तरह फाइलों में ही सिमटकर रह जाएगी?

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