बम्हिनिदीह में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन या हार का डर?

बम्हिनिदीह में भाजपा का शक्ति प्रदर्शन या हार का डर?

स्थानीय कार्यकर्ता गायब, बाहरी नेताओं के भरोसे चुनाव लड़ रही भाजपा

जांजगीर-चांपा।
बम्हिनिदीह नगर पंचायत उपचुनाव अब केवल एक स्थानीय चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। यही वजह है कि पूरे नगर में स्थानीय जनता से ज्यादा बाहरी नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का जमावड़ा दिखाई दे रहा है।

प्रदेश स्तर के नेता, दोनों जिलों के पदाधिकारी और दर्जनों गाड़ियों का काफिला देखकर ऐसा लग रहा है मानो भाजपा को अपने स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं पर भरोसा ही नहीं रह गया हो। नगर में जहां नजर डालिए, वहां बाहरी चेहरे प्रचार करते दिखाई दे रहे हैं, जबकि स्थानीय कार्यकर्ता पीछे छूटते नजर आ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर भाजपा को इतनी भारी भीड़ बाहर से बुलाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या पार्टी को बम्हिनिदीह में अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है? क्या भाजपा को अंदर ही अंदर हार का डर सताने लगा है?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी पार्टी के पास मजबूत स्थानीय समर्थन होता है तो उसे बाहर से नेताओं और कार्यकर्ताओं की फौज बुलाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। लेकिन बम्हिनिदीह में भाजपा जिस तरह पूरा सरकारी और संगठनात्मक दमखम लगा रही है, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी इस चुनाव को लेकर असहज और दबाव में दिखाई दे रही है।

विपक्ष भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कह रहा है कि बम्हिनिदीह की जनता अब “बाहरी प्रबंधन” नहीं बल्कि स्थानीय मुद्दों पर जवाब चाहती है। जनता यह भी पूछ रही है कि जो नेता चुनाव के समय बाहर से आकर माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं, क्या वे चुनाव खत्म होने के बाद भी बम्हिनिदीह की समस्याओं के लिए नजर आएंगे?

अब यह चुनाव केवल वोट का नहीं, बल्कि भाजपा के दावों और जमीनी हकीकत की परीक्षा बनता जा रहा है।

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