जिला स्तरीय ज्वाजलय लोक महोत्सव में नगरीय प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

जिला स्तरीय ज्वाजलय लोक महोत्सव में नगरीय प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल


दुकानदारों से सफाई शुल्क के नाम पर वसूली का आरोप, विकास की मंशा पर खड़े हुए प्रश्न

जांजगीर-चांपा। जिला प्रशासन जांजगीर-चांपा के तत्वावधान में आयोजित जिला स्तरीय ज्वाजलय लोक महोत्सव एवं कृषि मेले का उद्देश्य जहां जिलेवासियों को कृषि, स्वरोजगार और जनहितकारी योजनाओं से जोड़ना बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर नगरीय प्रशासन की कार्यशैली को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

महोत्सव स्थल पर लगाए गए फुटकर व्यापारियों ने नगर पालिका नगर पालिका जांजगीर-नैला के कुछ कर्मचारियों पर सफाई शुल्क के नाम पर जबरन वसूली का आरोप लगाया है। दुकानदारों का कहना है कि महोत्सव ग्राउंड में पहुंचकर कर्मचारियों द्वारा अलग-अलग दुकानों से 500 रुपए से लेकर 2000 रुपए तक की राशि वसूली जा रही है। किसी से 900-1000 रुपए तो किसी से 2000 रुपए तक की मांग की गई।

अगल-बगल दुकानें, लेकिन शुल्क अलग-अलग

मंच के बाईं ओर पीछे की तरफ लगाए गए अस्थायी स्टॉलों में छोटे व्यापारी अपनी रोजी-रोटी के लिए दुकानें संचालित कर रहे हैं। आरोप है कि अगल-बगल लगी दुकानों से भी अलग-अलग राशि वसूली जा रही है, जिससे दुकानदारों में असंतोष व्याप्त है। उनका कहना है कि जब जिला प्रशासन द्वारा आयोजन किया गया है, तो क्या सफाई व्यवस्था के लिए पहले से कोई बजट निर्धारित नहीं किया गया?

सवालों के घेरे में नगरीय प्रशासन

इस मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

क्या नगरीय प्रशासन जिला प्रशासन से अलग होकर कार्य कर रहा है?

क्या महोत्सव मैदान की सफाई के लिए नगर पालिका को अतिरिक्त फंड की आवश्यकता है?

क्या यह वसूली अधिकृत है और इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को है?

या फिर किसी के द्वारा रसीद लेकर निजी स्तर पर वसूली की जा रही है?


अंकित मूल्य से अधिक पर बिक्री

महोत्सव स्थल पर एक निःशुल्क पानी स्टॉल को छोड़कर अधिकांश खाद्य एवं अन्य सामग्री की बिक्री अंकित मूल्य से अधिक दर पर किए जाने की भी शिकायत सामने आई है। इससे आम नागरिकों में भी नाराजगी देखी जा रही है।

विकास की मंशा पर असर

जहां एक ओर जिला प्रशासन मेले के माध्यम से विकास और जनकल्याण का संदेश देने का प्रयास कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यदि वसूली जैसे आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह आयोजन की छवि को धूमिल करने वाला साबित हो सकता है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले पर क्या संज्ञान लेता है और क्या जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है, या फिर यह मामला यूं ही दबा दिया जाएगा।

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