नवापारा रेत घाट पर फिर गूंजा मशीनों का शोर, कार्रवाई के बाद भी बेखौफ माफिया—प्रशासन पर उठे बड़े सवाल



नवापारा रेत घाट पर फिर गूंजा मशीनों का शोर, कार्रवाई के बाद भी बेखौफ माफिया—प्रशासन पर उठे बड़े सवाल

जांजगीर-चांपा। जिले में अवैध रेत उत्खनन पर सख्ती के तमाम दावों के बीच हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। हाल ही में प्रशासन द्वारा की गई बड़ी कार्रवाई के बाद भी नवापारा रेत घाट आज फिर से पूरी तरह चालू नजर आया, जहां बेधड़क तरीके से रेत का उत्खनन और परिवहन जारी रहा।

कार्रवाई के 48 घंटे भी नहीं टिक पाई सख्ती

24-25 अप्रैल की रात खनिज विभाग, राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने नवापारा सहित कई घाटों पर छापेमार कार्रवाई करते हुए पोकलेन, जेसीबी और दर्जनों वाहनों पर कार्रवाई की थी। उस वक्त दावा किया गया था कि अवैध उत्खनन पर सख्त रोक लगेगी।
लेकिन महज कुछ ही घंटों में हालात फिर पहले जैसे हो गए—घाट पर मशीनें लौट आईं और रेत का खेल फिर शुरू हो गया।

दिन-रात चल रहा है काला कारोबार

स्थानीय सूत्रों के अनुसार:

रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर उत्खनन

दिन में ट्रैक्टर और हाईवा से खुला परिवहन

कार्रवाई की भनक मिलते ही माफियाओं का फरार होना


यह सब दिखाता है कि पूरा नेटवर्क बेहद संगठित और सक्रिय है।

प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल

बार-बार हो रही कार्रवाई के बावजूद:

क्यों नहीं रुक पा रहा अवैध उत्खनन?

क्या सिर्फ खानापूर्ति बनकर रह गई है छापेमारी?

क्या माफियाओं को मिल रहा है अंदरूनी संरक्षण?


ये सवाल अब आम जनता के बीच खुलकर उठने लगे हैं।

नदी पर मंडरा रहा खतरा

लगातार हो रहे अंधाधुंध उत्खनन से हसदेव नदी का अस्तित्व संकट में पड़ता जा रहा है। नदी की धारा और पर्यावरण पर इसका सीधा असर पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी कई गंभीर संकेत दे रही है।

जनता में बढ़ता आक्रोश

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन ने अब भी कड़ी और स्थायी कार्रवाई नहीं की, तो यह अवैध कारोबार और भी बेलगाम हो जाएगा। लोगों ने जिम्मेदार अधिकारियों से जमीनी स्तर पर सख्त निगरानी और लगातार कार्रवाई की मांग की है।




सीधी बात

कार्रवाई हो रही है… लेकिन असर नहीं दिख रहा।
माफिया रुक नहीं रहे… और सिस्टम थम नहीं रहा।

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