छोटों पर सख्ती, रसूखदारों पर नरमी?

छोटों पर सख्ती, रसूखदारों पर नरमी?
चांपा थाने की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल, आम लोगों के साथ कथित बदसलूकी और प्रभावशाली लोगों को प्राथमिकता देने के आरोप
चांपा। क्या कानून व्यक्ति का कद देखकर लागू होता है? क्या थाने की चौखट पर पहुंचते ही आम आदमी और रसूखदार के लिए नियम बदल जाते हैं? चांपा थाना क्षेत्र में पुलिस की कथित कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों के बाद ये सवाल अब चर्चा का विषय बनते जा रहे हैं। हालांकि लगाए जा रहे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
स्थानीय लोगों की मानें तो आम नागरिक अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचता है तो उसे कार्रवाई के लिए कई प्रक्रियाओं से गुजरने की बात कही जाती है। वहीं कुछ लोगों का आरोप है कि शिकायत या किसी काम से थाने पहुंचने वाले सामान्य नागरिकों के साथ कथित तौर पर सख्त और कई बार अभद्र व्यवहार तक किया जाता है।
इसके विपरीत शहर के प्रभावशाली लोगों, बड़े कारोबारियों या प्रतिष्ठित व्यक्तियों के थाने पहुंचने पर कथित तौर पर पुलिस का व्यवहार अलग दिखाई देता है। स्थानीय स्तर पर ऐसी चर्चाएं हैं कि प्रभावशाली लोगों के मामलों को प्राथमिकता मिलने के साथ उनके काम के लिए पुलिसकर्मियों के कार्यालय तक पहुंचने की स्थिति भी सामने आती है।
सवाल कार्रवाई का नहीं, समान व्यवहार का है
पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना और प्रत्येक नागरिक की शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई करना है। ऐसे में सवाल यह नहीं है कि किसी व्यक्ति की शिकायत जल्दी सुनी गई या देर से, बल्कि सवाल यह है कि क्या हर व्यक्ति के साथ समान सम्मान और समान प्रक्रिया अपनाई जा रही है?
यदि किसी आम नागरिक के साथ शिकायत लेकर थाने पहुंचने पर अभद्र भाषा या अनुचित व्यवहार किया जाता है, तो यह पुलिस और जनता के बीच विश्वास के लिए गंभीर विषय हो सकता है। वहीं यदि प्रभावशाली लोगों को उनकी सामाजिक या आर्थिक स्थिति के कारण विशेष प्राथमिकता मिलने की धारणा बन रही है, तो वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी निष्पक्ष समीक्षा करनी चाहिए।
बीट व्यवस्था पर भी सवाल
शहर में अपराध और नशे से जुड़ी गतिविधियों को लेकर भी नागरिकों में चिंता बनी हुई है। खासकर युवाओं के नशे की गिरफ्त में आने को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। ऐसे में बीट पुलिसिंग को मजबूत करना और पुलिसकर्मियों की अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करना जरूरी माना जा रहा है।
नागरिकों का कहना है कि बीट अधिकारी केवल घटना होने के बाद मौके पर पहुंचने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने क्षेत्र के लोगों के साथ नियमित संपर्क में रहें और मोहल्ले में होने वाली गतिविधियों की जानकारी भी रखें। साथ ही आम लोगों को यह भी स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि उनके क्षेत्र के बीट अधिकारी कौन हैं और आवश्यकता पड़ने पर उनसे किस प्रकार संपर्क किया जा सकता है।
वरिष्ठ अधिकारी लें संज्ञान
स्थानीय लोगों का कहना है कि समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा थाने की कार्यप्रणाली, शिकायतों के निपटारे और बीट व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए। यदि कहीं पुलिस और आम जनता के बीच संवाद की कमी है या किसी वर्ग को लेकर अलग व्यवहार की शिकायतें मिल रही हैं तो उन्हें गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
कानून की ताकत तभी प्रभावी दिखाई देती है, जब नागरिक को यह भरोसा हो कि उसकी सामाजिक हैसियत चाहे जो भी हो, पुलिस के सामने उसकी शिकायत की कीमत समान है।
अब देखना होगा कि चांपा थाना क्षेत्र में सामने आ रही इन चर्चाओं और आरोपों पर पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी क्या संज्ञान लेते हैं और क्या स्थिति स्पष्ट करते हैं।
पुलिस का पक्ष: चांपा थाना पुलिस/वरिष्ठ अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
“थाने में भी ‘कद’ देखकर व्यवहार? आम आदमी के लिए सख्ती, रसूखदारों के लिए नरमी के आरोप”




