चांपा में गैस संकट: सिलेंडर के लिए लंबी कतारें, नियमों की उड़ रही धज्जियां

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गैस सिलेंडर लेने लाइन में लगे लोग
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कतार में अपनी बारी का इंतजार करते हुए, साथ ही नियम विरुद्ध तरीके से खुले में गैस सिलेंडर देते वितरण एजेंसी के लोग

चांपा में गैस संकट: सिलेंडर के लिए लंबी कतारें, नियमों की उड़ रही धज्जियां

चांपा। एक ओर सरकार द्वारा रसोई गैस की पर्याप्त उपलब्धता के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चांपा नगर में उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर लेने के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। गैस की समस्या को लेकर सरकार द्वारा विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं, जैसे व्हाट्सऐप के माध्यम से बुकिंग और डिलीवरी की जानकारी देना, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है।

भालेराव मैदान में वितरक एजेंसी हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस खुलेआम बाटे जाने का मामला आ रहा है सामने।

लाइन में लगने को मजबूर उपभोक्ता
शासन की योजनाओं और डिजिटल सुविधाओं से अनजान या वंचित आम लोग आज भी गैस एजेंसियों के बाहर लाइन में लगकर सिलेंडर लेने को मजबूर हैं। इससे स्पष्ट होता है कि व्यवस्था और जागरूकता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।

नियमों का नहीं हो रहा पालन
सरकारी नियमों के अनुसार, गैस सिलेंडर वितरण के समय तौल कर देना और लीकेज की जांच करना अनिवार्य है। लेकिन चांपा में इन नियमों की अनदेखी करते हुए सीधे लाइन में खड़े उपभोक्ताओं को सिलेंडर थमा दिए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

कालाबाजारी का भी आरोप
गैस की कमी का हवाला देकर कुछ बिचौलिए ऊंचे दामों पर सिलेंडर बेच रहे हैं। प्रशासन द्वारा समय-समय पर चेकिंग अभियान चलाए जाने के बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव दिखाई दे रहा है, जिससे कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है।

भालेराव मैदान में नियम विरुद्ध वितरण
नगर के भालेराव मैदान में खुलेआम हिंदुस्तान पेट्रोलियम गैस सिलेंडर का वितरण किया जा रहा है, जो कि नियमों के खिलाफ है। यह क्षेत्र रिहायशी होने के साथ-साथ आसपास अस्पताल और मेडिकल सुविधाएं भी मौजूद हैं। ऐसे में बिना सुरक्षा मानकों के खुले में गैस वितरण किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे सकता है।

प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
स्थानीय लोगों द्वारा कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। इससे एजेंसी संचालकों के हौसले बुलंद हैं और वे मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे।

निष्कर्ष
सरकार द्वारा बनाई गई नीतियां और जमीनी अमल के बीच का अंतर चांपा में साफ नजर आ रहा है। जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर जाकर नियमित जांच करें और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और किसी संभावित हादसे से बचा जा सके।

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