25 जून : संविधान हत्या दिवस पर भाजपा ने किया मीसा बंदियों का सम्मान

25 जून : संविधान हत्या दिवस पर भाजपा ने किया मीसा बंदियों का सम्मान
आज भारतीय जनता पार्टी, जिला जांजगीर-चांपा द्वारा 25 जून को “संविधान हत्या दिवस” के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर जिला भाजपा कार्यालय में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसा बंदियों का शाल, श्रीफल, पुष्पगुच्छ एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री नारायण चंदेल ने आपातकाल के विषय में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि 25 जून 1975 को तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने राजनीतिक विरोध और जनआंदोलनों से भयभीत होकर देश में आपातकाल लागू किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद द्वारा संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत आपातकाल की घोषणा की गई, जिसके बाद देशभर में लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हुआ, प्रेस की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया तथा जनसंघ, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं अन्य विपक्षी दलों के हजारों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेलों में बंद कर दिया गया।
श्री चंदेल ने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उस समय वे विद्यालय के छात्र थे। उनके पिता स्वर्गीय श्री जंगीराम चंदेल, जो जनसंघ के सक्रिय नेता थे, उन्हें भी पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। उन्होंने बताया कि उस दौर में केवल बंदियों को ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों को भी सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई, बच्चों की शिक्षा बाधित हुई तथा अनेक परिवारों को अभाव और संघर्ष के बीच जीवनयापन करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का एक काला अध्याय था, जब नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बनाया गया। ऐसे कठिन समय में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसा बंदियों का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने भी आपातकाल के दौरान हुए घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नई पीढ़ी को उस कालखंड की वास्तविकताओं से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के प्रति जागरूकता बनी रहे।श्री नारायण चंदेल ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज की युवा पीढ़ी, विशेष रूप से भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं को आपातकाल के इतिहास और उसके दुष्परिणामों की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को यह जानना आवश्यक है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए मीसा बंदियों और जनसंघ तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने किस प्रकार संघर्ष किया तथा किन-किन यातनाओं और कठिनाइयों का सामना किया।इसके पूर्व दिनांक 24 जून को सायं 5 बजे भारतीय जनता पार्टी, जिला जांजगीर-चांपा द्वारा आपातकाल के विरोध एवं लोकतंत्र की हत्या के प्रतिकार स्वरूप जिला न्यायालय (कचहरी चौक) जांजगीर से अटल चौक तक मौन पदयात्रा निकाली गई थी। इस मौन जुलूस में बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं नागरिक शामिल हुए। प्रतिभागियों ने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों पर हुए प्रहार को स्मरण करते हुए लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प लिया।कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्री रामदेव कुमावत जी, श्री अम्बेश जांगड़े जी (जिलाध्यक्ष), श्री प्रशांत सिंह जी, श्री अमर सोल्तानिया जी, श्रीमती सत्यलता मीरी जी, श्रीमती रजनी साहू जी, श्री संतोष लहरे जी, श्री नंद चौधरी जी तथा श्रीमती नंदिनी राजवाड़े , पुष्पेंद्र प्रताप सिंह जी, रवि पांडेय,समीर शुक्ला, लक्ष्मी देवांगन,मीरा पतकी, संतोषी दुबे,पंकज अग्रवाल, विकास शर्मा,प्रदीप शरफ,रामखुबवानी, राकेश रूपवानी,अनिल शर्मा,हितेश यादव, संतोष थवाईत, शिवेंद्र सिंह, धजा राम, संतोषी सिंह, रेखा गढ़वाल,राजेश्वर पाटले, आकाश सिंह, शिव चमन, सोनू यादव,डॉ जागृति, पूजा राठौर,प्रतिमा पाटले, रितेश,पुष्पेंद्र, अभिषेक, गोलू, प्रदीप, नवीन धीवर, राजेंद्र पांडेय, प्रेम थवाईत,रिया,सोनू,उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, मोर्चा-प्रकोष्ठ के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उक्त जानकारी राकेश रूपवानी ,जिला मीडिया प्रभारी ,
भारतीय जनता पार्टी जांजगीर चांपा ने दी है।







