


सांसद कमलेश जांगड़े को अपने ही लोकसभा क्षेत्र का पूरा नाम लेने में हिचकिचाहट?
वायरल वीडियो में कहा ‘जांजगीर लोकसभा’, जबकि निर्वाचन संबंधी रिकॉर्ड में दर्ज है ‘जांजगीर-चांपा लोकसभा’
जांजगीर चांपा। केंद्रीय कृषि मंत्री के आज 11 सितंबर को सक्ती जिला के कॉलेज ग्राउंड जेठा में प्रस्तावित कार्यक्रम से ठीक पहले जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े द्वारा सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया गया। अब यही वीडियो राजनीतिक चर्चा का विषय बनता नजर आ रहा है।
वायरल वीडियो में सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े को “मेरे लोकसभा क्षेत्र जांजगीर” कहते हुए सुना जा सकता है। जबकि निर्वाचन संबंधी सार्वजनिक रिकॉर्ड एवं शासकीय दस्तावेजों में लोकसभा क्षेत्र का नाम “जांजगीर-चांपा लोकसभा” दर्ज है। आप स्वयं देख सकते हैं कि निर्वाचन की सार्वजनिक शैली में दर्ज नाम ‘जांजगीर-चांपा लोकसभा’ है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सांसद द्वारा अपने ही लोकसभा क्षेत्र का पूरा नाम नहीं लिया जाना महज बोलने की चूक है या इसके पीछे कोई और वजह है? इस संबंध में सांसद की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
चुनाव के समय मतदाताओं के बीच पहुंच, अब क्षेत्र के नाम पर सवाल
चुनाव के दौरान अपने मतदाताओं के बीच पहुंचकर अपने पक्ष में मतदान की अपील करने वाली सांसद के इसी क्षेत्र के नाम को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि जब चुनाव के समय इसी लोकसभा क्षेत्र के मतदाताओं से समर्थन मांगा गया, तो अब अपने ही लोकसभा क्षेत्र का पूरा नाम लेने में हिचकिचाहट क्यों दिखाई दे रही है?
हालांकि, यह भी संभव है कि वायरल वीडियो में नाम लेते समय यह महज बोलने की चूक हो। लेकिन इस छोटी सी बात ने सांसद की क्षेत्रीय सक्रियता और जनता से उनके संवाद को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
चुनाव के बाद भी जिला मुख्यालय में कार्यालय का इंतजार
दूसरी ओर, निर्वाचन के बाद काफी समय बीत जाने के बावजूद क्षेत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय में सांसद का स्थायी जनसंपर्क कार्यालय नहीं खुल पाने को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं।
जनता की शिकायत है कि अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर सांसद से मुलाकात करना आसान नहीं है। जब इस मुद्दे को लेकर सवाल उठने लगे तो भाजपा के जिला कार्यालय में मिलने की बात कही गई थी, लेकिन वहां भी आम लोगों की सांसद से नियमित मुलाकात नहीं हो पाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
मीडिया द्वारा सवाल किए जाने पर सांसद की ओर से जिला मुख्यालय में जल्द ही निजी कार्यालय खोले जाने की घोषणा की गई थी। लेकिन इस घोषणा को भी करीब दो माह बीत जाने के बाद कार्यालय शुरू नहीं हो पाने को लेकर अब जनता के बीच चर्चा का दौर शुरू हो गया है।
पार्टी कार्यक्रमों में मौजूदगी, जनता के सवालों से दूरी?
क्षेत्र में यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि सांसद विभिन्न पार्टी कार्यक्रमों में तो अपनी मौजूदगी दर्ज करवाती हैं, लेकिन आम जनता की समस्याओं को सुनने और उनके बीच नियमित रूप से उपलब्ध रहने की स्थिति क्या है?
आरोप लगाए जा रहे हैं कि कई कार्यक्रमों में मौजूदगी दर्ज कराने के बाद सांसद कार्यक्रम समाप्त होते ही रवाना हो जाती हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
जनता का सवाल सीधा है—यदि अपने क्षेत्र की जनता को अपनी समस्या रखने के लिए ही सांसद को तलाशना पड़े, तो क्षेत्र की समस्याएं सांसद तक कैसे पहुंचेंगी और उनका समाधान कैसे होगा?
‘जांजगीर’ या ‘जांजगीर-चांपा’—नाम के बहाने बड़ा सवाल
वायरल वीडियो में सांसद द्वारा “मेरे लोकसभा क्षेत्र जांजगीर” कहे जाने और निर्वाचन संबंधी सार्वजनिक रिकॉर्ड में “जांजगीर-चांपा लोकसभा” दर्ज होने के बीच अब राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।
सवाल यह है कि क्या यह केवल जुबान फिसलने की सामान्य घटना है या सांसद को अपने निर्वाचन क्षेत्र की आधिकारिक पहचान स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए?
अब क्षेत्र की जनता भी यह जानना चाहती है कि सांसद उनके बीच कितनी उपलब्ध हैं, उनकी समस्याओं को लेकर कितनी सक्रिय हैं और चुनाव के दौरान किए गए वादों में से कितने वादे धरातल पर दिखाई दे रहे हैं।
इन तमाम सवालों को लेकर क्षेत्र की जनता की राय जल्द ही सामने लाई जाएगी।




