राम मिलेंगे आश्रम में “शबरी की निष्ठा” महाआयोजन: 50 लोगों की घर वापसी, गूंजा “जय श्रीराम”

राम मिलेंगे आश्रम में “शबरी की निष्ठा” महाआयोजन: 50 लोगों की घर वापसी, गूंजा “जय श्रीराम”

जांजगीर-चांपा। जिले के शिवरीनारायण क्षेत्र के तेंदुआ स्थित राम मिलेंगे आश्रम इन दिनों भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बना हुआ है, जहां चल रहे विशाल धार्मिक आयोजन “शबरी की निष्ठा” कार्यक्रम ने पूरे क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। यह भव्य आयोजन देशभर में ख्याति प्राप्त संत जगद्गुरु रामभद्राचार्य के सानिध्य में आयोजित हो रहा है और अब अपने समापन की ओर अग्रसर है।

इस कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण रहा करीब 50 लोगों (महिलाओं और बच्चों सहित) की घर वापसी, जिसे प्रदेश के घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप जूदेव के नेतृत्व में विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के साथ संपन्न कराया गया। इस दौरान पूरे परिसर में भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।

घर वापसी की प्रक्रिया के दौरान सभी लोगों के चरण धोकर उनका सम्मान किया गया, जो भारतीय संस्कृति में श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद परम पूज्य संत रामभद्राचार्य जी ने सभी को राम नाम का दुपट्टा, तुलसी माला एवं सुंदरकांड भेंट कर उन्हें आध्यात्मिक रूप से सशक्त किया। उन्होंने सभी को आशीर्वाद देते हुए “जय श्रीराम” के उद्घोष कराए, जिससे पूरा आश्रम गूंज उठा।

घर वापसी करने वाले लोगों ने भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ इस प्रक्रिया को स्वीकार किया और भगवान श्रीराम के जयकारों के साथ अपनी खुशी व्यक्त की। कई लोगों ने इसे अपने जीवन का महत्वपूर्ण और भावनात्मक क्षण बताया।

कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेत्री संगीता सिंह ने कहा कि यह अत्यंत गर्व और खुशी का विषय है कि आज इस मंच के माध्यम से करीब 50 लोग अपने मूल धर्म में लौटे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भिन्न परिस्थितियों और प्रभावों के कारण अपने धर्म से दूर हो गए थे, लेकिन आज उन्होंने अपनी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय लिया है, जो समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है।

वहीं, प्रदेश प्रमुख प्रबल प्रताप जूदेव ने अपने संबोधन में कहा कि “घर वापसी केवल धर्म परिवर्तन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपरा और पहचान की ओर लौटने की प्रक्रिया है।” उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से समाज को जागरूक करने और लोगों को उनकी जड़ों से जोड़ने का कार्य निरंतर जारी रहेगा।

पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु, ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता एवं धर्मप्रेमी लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए और इसे सफल बनाया।

कार्यक्रम शांतिपूर्ण और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी एक मजबूत संदेश दिया।

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