




3 लाख का मुक्तिधाम चंद महीनों में जर्जर!
ग्राम पंचायत मुड़पार में भ्रष्टाचार के आरोप, ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग
जांजगीर चांपा। जिले के पामगढ़ में जनहित और अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक सुविधाओं के लिए शासन द्वारा करोड़ों नहीं तो लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, ताकि ग्रामीणों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। लेकिन ग्राम पंचायत मुड़पार, ब्लॉक पामगढ़ में 15वें वित्त आयोग की राशि से निर्मित मुक्तिधाम अब निर्माण गुणवत्ता और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में 3 लाख रुपये की लागत से मुक्तिधाम निर्माण कार्य स्वीकृत हुआ था। निर्माण कार्य नवंबर 2024 में शुरू होकर फरवरी 2025 में पूर्ण बताया गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि निर्माण पूर्ण होने के कुछ ही महीनों बाद मुक्तिधाम की दीवारों और प्लेटफॉर्म में दरारें दिखाई देने लगी हैं। कई जगहों पर प्लास्टर उखड़ रहा है और निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया और शासकीय राशि का सही उपयोग करने के बजाय कमीशनखोरी और अनियमितताओं को बढ़ावा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप किया गया होता तो इतनी कम अवधि में भवन की यह स्थिति नहीं होती।
सरपंच पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप
ग्रामीणों के बीच चर्चा है कि निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरती गई है। आरोप लगाया जा रहा है कि कार्य की गुणवत्ता से समझौता कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल
जब निर्माण नया है तो दरारें क्यों पड़ रही हैं?
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच किसने की?
तकनीकी अधिकारियों ने कार्य का निरीक्षण किया या नहीं?
शासकीय राशि का पूरा उपयोग निर्माण में हुआ या नहीं?
जांच की मांग तेज
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, जनपद पंचायत और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मांग की है कि मुक्तिधाम निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए तथा गुणवत्ता परीक्षण कराया जाए। यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाए।




