रक्षाबंधन विशेष …. धान से निर्मित राखी बनी आकर्षण का केंद्र

धान की कारीगरी करते हुए राखी बनाते हुए
धान और चावल से निर्मित होती राखियां
धान से राखी बनाते चूड़ामणि और उनकी पत्नी सरस्वती के साथ समिति की सदस्य

रक्षाबंधन विशेष……धान से निर्मित राखी बनी आकर्षण का केंद्र


जांजगीर चांपा। जांजगीर चांपा जिले में सारागांव के देवरी में किसान परिवार से आने वाले चूड़ामणि  एवं उनकी पत्नी के साथ समिति की माता बहने ने धान और चावल द्वारा  राखी बनाई है जो लोगों को खूब भा रही है। वही इनके द्वारा निर्मित राखी बहनों के बीच में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।  माता बहने हाथों हाथ धान से बनी राखियां खरीद कर ले जा रही है। वही धान और चावल का प्रयोग कर रखी का निर्माण करने वाले देवरी के  चूड़ामणि सूर्यवंशी और उनकी पत्नी सरस्वती की अलग पहचान बनी हुई है। उनका कहना है कि यहां बनी राखियां जिले एवं प्रदेश के साथ आस पास के लोगों की पसंद बनी हुई है तो वही अपने घर से यह कार्य संचालित कर रहे है तो और समिति की कुछ महिलाएं  इस कला को सीखने के लिए उनके घर आते है और  लगन के साथ  चुण्डमणि अपनी इस कला को आए हुए सभी लोगों को सीखा भी रहे है। इस वर्ष उनके द्वारा बनाई गई धान की राखियां  बिक्री के लिए बाजार में उपलब्ध है तो वही जानकार लोग उनके घर पहुंच कर  राखियां खरीद कर ले जा रहे है । आपको बता दे कि रक्षाबंधन के अवसर पर  धान से रखी बनाने वाले चूड़ामणि सूर्यवंशी पहले से पैरा आर्ट से अपनी पहचान देश भर में बना चुके  है और जांजगीर चांपा जिले में संचालित छत्तीसगढ़ हस्त कला विकास  बोर्ड से पंजीकृत मास्टर ट्रेनर के पद पर नियुक्त किए गए है और अपनी कला से अपनी अलग पहचान बनाने की उपलब्धि हासिल की है। आगे उन्होंने बताया कि शासन द्वारा समय समय पर ट्रेनिंग के लिए मुझे जगह जगह भेजा जाता है परंतु यहां जगह के अभाव  की वजह से इस कला में निखर नहीं आ पा रहा है उनका शासन का आग्रह  है कि अगर शासन  इस कला के लिए विशेष ध्यान दे और एक जगह निर्धारित कर दे तो इस कला को और सम्मान मिलेगा।

धान से निर्मित राखियां बाजार में उपलब्ध

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