सीएमओ के बिगड़े बोल: “जो करना है कर लो, मैं नहीं दूंगा जवाब”

सीएमओ के बिगड़े बोल: “जो करना है कर लो, मैं नहीं दूंगा जवाब”

चांपा। नगर पालिका परिषद चांपा में इन दिनों प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के रवैये को लेकर जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों में नाराज़गी देखी जा रही है।

आरोप है कि सीएमओ का व्यवहार लगातार असहयोगात्मक होता जा रहा है। जानकारी मांगने या किसी मुद्दे पर जवाब लेने पहुंचे लोगों को अक्सर “बहुत व्यस्त हूं” कहकर टाल दिया जाता है। वहीं, कई बार स्थिति ऐसी भी बन जाती है जब सीधे तौर पर कह दिया जाता है— “जाओ, मैं कोई जवाब नहीं दूंगा, जो करना है कर लो।”

स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पालिका जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में बैठे जिम्मेदार अधिकारी से इस तरह के व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती। एक ओर जहां अधिकारी अपने ही आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने में नाकाम नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनता और जनप्रतिनिधियों के सवालों से बचते दिख रहे हैं।

यह भी चर्चा में है कि जनप्रतिनिधियों की शालीनता और शांत स्वभाव का फायदा उठाकर अधिकारी अपनी जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जनता की सेवा के लिए नियुक्त अधिकारी दफ्तर में बैठकर काम करने के बजाय आराम फरमाते नजर आते हैं।

मामला सीएमओ रामसंजीवन सोनवानी से जुड़ा बताया जा रहा है, जिन पर यह भी आरोप है कि वे कई मामलों में “जानकारी नहीं है” कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं।

घटना के बाद इस पूरे मामले की शिकायत जिला कलेक्टर को भेजी गई है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या संबंधित अधिकारी के व्यवहार में सुधार आता है।

फिलहाल, नगर पालिका परिषद चांपा में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

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