क्या गिट्टी खदानों में हो रही है राजस्व चोरी? सवालों के घेरे में खनन कारोबार
बिना रॉयल्टी परिवहन, विभागीय कार्यवाही पर भी उठे सवाल, ‘सेटिंग’ की चर्चाएं तेज

क्या गिट्टी खदानों में हो रही है राजस्व चोरी? सवालों के घेरे में खनन कारोबार
बिना रॉयल्टी परिवहन, विभागीय कार्यवाही पर भी उठे सवाल, ‘सेटिंग’ की चर्चाएं तेज

जांजगीर-चांपा।
जिले में संचालित गिट्टी खदानों को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—क्या कुछ खदान संचालक शासन को राजस्व का चूना लगा रहे हैं? नियमों और शर्तों का पालन करने की शपथ के बावजूद कई मामलों में अनियमितताएं सामने आने से यह संदेह और गहरा गया है।

सूत्रों और हालिया घटनाओं के आधार पर यह बात सामने आई है कि गिट्टी के अवैध परिवहन का खेल लगातार जारी है। शासन को मिलने वाली रॉयल्टी के बिना ही ट्रैक्टर और हाइवा जैसे भारी वाहन दिनदहाड़े सड़कों पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। इससे सीधे तौर पर शासन के राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है।

हाल ही में जिला कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग ने कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर बिना रॉयल्टी गिट्टी का परिवहन कर रहे वाहनों को पकड़ा। इनमें ट्रैक्टर और हाइवा शामिल थे। चांपा थाना क्षेत्र में भी एक हाइवा को पकड़ा गया, जो कथित रूप से बिरगहनी गांव स्थित एक खदान से गिट्टी लेकर आ रहा था। हैरानी की बात यह रही कि वाहन को थाना से महज कुछ दूरी पर ही पकड़ा गया।

इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि दिन में ही बिना रॉयल्टी के वाहन आसानी से निकल रहे हैं, तो रात के समय होने वाले परिवहन की स्थिति क्या होगी? क्या यह अवैध गतिविधि लगातार जारी है?

सूत्रों के अनुसार, कुछ खदान संचालकों और विभागीय अधिकारियों के बीच “सेटिंग” की भी चर्चाएं हैं। आरोप है कि कार्रवाई के बाद भी वाहनों को जल्द ही छोड़ दिया जाता है, जिससे संदेह और गहराता है। यही कारण बताया जा रहा है कि कुछ कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

यह भी सामने आया है कि संबंधित खदान के खिलाफ पहले भी शिकायतें हो चुकी हैं और जांच भी हुई थी। हालांकि, उस समय कार्रवाई का स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आ पाया। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि कहीं न कहीं मामले को दबाने की कोशिश की गई।

जब इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी हेलेंद्र कुमार से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इसे अपने कार्यकाल से पहले का मामला बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार किया और व्यस्तता का हवाला दिया।

गौरतलब है कि खनिज से मिलने वाला राजस्व न केवल जिले, बल्कि प्रदेश के विकास में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में यदि इस प्रकार की अनियमितताएं होती हैं, तो इसका सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई करेगा, या फिर यह मामला भी फाइलों के नीचे दबकर रह जाएगा।

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