गुरु ही शिष्य को ज्ञानवान, चरित्रवान व समर्थवान बनाता है – डॉ. रामरतन श्रीवास

जांजगीर-चांपा: गुरु ही शिष्य को ज्ञानवान, चरित्रवान व समर्थवान बनाता है – डॉ. रामरतन श्रीवास

जांजगीर-चांपा। गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए एक भावनात्मक एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिसौद में किया गया। वर्ष 1988 के पूर्व विद्यार्थियों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में गुरु राधेश्याम कंवर के सेवा निवृत्ति अवसर को यादगार बनाया गया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. रामरतन श्रीवास ‘राधे राधे’ ने कहा कि गुरु ही शिष्य के जीवन में ज्ञान रूपी अमृत का संचार कर उसे ज्ञानवान, चरित्रवान और समर्थवान बनाता है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर बताते हुए राष्ट्र निर्माण में इसकी भूमिका को अतुलनीय बताया।

इंजीनियर विनय सिंह क्षत्रिय ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा केवल शिक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास का आधार है। वहीं इंजीनियर रमेश साव ने गुरु को ज्ञान और अनुभव की ज्योति तथा शिष्य को उस ज्योति को आत्मसात करने वाला बताया।

कृष्ण कुमार साहू ने कहा कि शिष्य का कर्तव्य है कि वह गुरु के उपदेशों को अपने जीवन में उतारे। कवयित्री लतेलिन ‘लता’ प्रधान ने गुरु-शिष्य संबंध को ज्ञान और साधना की ओर ले जाने वाला अनमोल रिश्ता बताया। ऊषा यादव ने इसे समाज को सशक्त बनाने वाला संबंध कहा, जबकि सियाबाई ने गुरु महिमा को अनंत बताते हुए उसका पूर्ण वर्णन असंभव बताया।

कार्यक्रम के दौरान गुरु राधेश्याम कंवर अपने शिष्यों को विभिन्न क्षेत्रों में सफल होते देख भावुक हो उठे। उन्होंने सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनके शिष्य आज इंजीनियर, डॉक्टर, शासकीय व निजी सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रहे हैं।

इस अवसर पर कंवर गुरुजी ने डॉ. रामरतन श्रीवास ‘राधे राधे’ को पशुपतिनाथ भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय साहित्य महोत्सव का ब्रांड एम्बेसडर बनने पर बधाई दी।

कार्यक्रम में गुरु वंदना, आरती एवं काव्य पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें कवयित्री लतेलिन ‘लता’ प्रधान और डॉ. रामरतन श्रीवास ने अपनी रचनाओं से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विशेष रूप से ‘कलम की मुस्कान ‘लता’’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया। अंत में गुरु राधेश्याम कंवर को स्मृति चिन्ह, अंगवस्त्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया, वहीं उनके कर कमलों से सभी छात्र-छात्राओं को भी मेडल प्रदान किए गए।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी जनों ने गुरु-शिष्य परंपरा के इस अनुपम आयोजन को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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