धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 के विरोध में सड़कों पर उतरा मसीह समाज, चांपा में सैकड़ों की भीड़ के साथ जोरदार प्रदर्शन

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धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 के विरोध में सड़कों पर उतरा मसीह समाज, चांपा में सैकड़ों की भीड़ के साथ जोरदार प्रदर्शन

जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ में हाल ही में पारित धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 के विरोध में चांपा शहर में मसीह समाज के सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। शहर का माहौल उस समय गरमा गया जब चांपा मसीह समाज संगठन के लोग बड़ी संख्या में  एकजुट होकर रैली निकालते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करने लगे।

प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर लेकर “संविधान बचाओ”, “मौलिक अधिकारों का हनन बंद करो”, “धर्म विरोधी कानून वापस लो” जैसे नारे बुलंद किए। रैली में शामिल लोगों का कहना है कि यह कानून उनकी धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार करता है, जिसे वे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे।

रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए निकली, जहां प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की, लेकिन उनके नारों में साफ तौर पर आक्रोश झलक रहा था। इस दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। रैली के साथ-साथ पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।



क्या है धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026?

धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 एक ऐसा प्रस्तावित/पारित कानून बताया जा रहा है, जिसका उद्देश्य जबरन, प्रलोभन देकर या धोखे से किए जाने वाले धर्मांतरण (धर्म परिवर्तन) पर रोक लगाना है।

इस तरह के कानूनों में आमतौर पर निम्न प्रावधान शामिल होते हैं:

बलपूर्वक, लालच या छल के जरिए धर्म परिवर्तन को प्रतिबंधित करना

धर्म परिवर्तन से पहले प्रशासन को सूचना देने या अनुमति लेने की प्रक्रिया

नियमों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान

शिकायत मिलने पर जांच और कानूनी कार्रवाई की व्यवस्था


हालांकि, विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग हो सकता है और यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता व धार्मिक अधिकारों को प्रभावित करता है।




प्रदर्शनकारियों की मांग

मसीह समाज के लोगों ने सरकार से इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए और किसी भी ऐसे कानून को लागू नहीं किया जाना चाहिए जो इन अधिकारों को सीमित करता हो।



प्रशासन की भूमिका

रैली के दौरान पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने में जुटा रहा। फिलहाल, प्रशासन या सरकार की ओर से इस विरोध को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।



इस प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026 को लेकर समाज के एक वर्ग में असंतोष है, और आने वाले समय में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक व सामाजिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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