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मुख्यमंत्री के दौरे के दो दिन बाद वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 3 परिवार हुए बेघर,18 परिवारों को नोटिस, अतिक्रमण हटाने चला बुलडोजर

मुख्यमंत्री के दौरे के दो दिन बाद वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, 3 परिवार हुए बेघर,18 परिवारों को नोटिस, अतिक्रमण हटाने चला बुलडोजर

जांजगीर-चांपा। जिले के बम्हनीडीह क्षेत्र के अफरीद मुड़पार में वन विभाग ने शनिवार सुबह तड़के अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई करते हुए वन भूमि पर बने 3 मकानों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया।वही 18 परिवारों को नोटिस दी गई है। कार्रवाई के बाद वर्षों से यहां रह रहे 3 परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। मौके पर वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस का भारी अमला तैनात रहा।

बताया जा रहा है कि अभी दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बम्हनीडीह नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री के दौरे के दो दिन बाद वन विभाग ने अपनी आवंटित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार प्रशासनिक अमला सुबह करीब 4 बजे ही मौके पर पहुंच गया था। इसके बाद मकानों से लोगों का सामान बाहर निकलवाया गया और बुलडोजर की सहायता से एक-एक कर सभी 3 मकानों को ढहा दिया गया।वही बाकी के परिवारों को घर खाली करने की नोटिस दी गई है। कार्रवाई के बाद परिवारों का घरेलू सामान खुले में पड़ा हुआ है।

बारिश के बीच बेघर हुए परिवार

प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे कई वर्षों से यहां रह रहे थे। अब बरसात के मौसम में उनके सामने सबसे बड़ी समस्या रहने की है। उनका कहना है कि न सिर पर छत बची है और न ही सामान सुरक्षित रखने की कोई व्यवस्था। खुले आसमान के नीचे रखे सामान के भीगने की चिंता उन्हें लगातार सता रही है। प्रभावित परिवार प्रशासन से वैकल्पिक आवास या राहत की मांग कर रहे हैं।

बाउंड्रीवाल तोड़े जाने पर भी उठे सवाल

कार्रवाई के दौरान वन भूमि से लगे बच्चों के खेल मैदान की बाउंड्रीवाल का एक हिस्सा भी तोड़े जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मैदान बच्चों के खेल एवं गतिविधियों के लिए सुरक्षित किया गया था तथा शासन की राशि से इसकी बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया गया था। ऐसे में कार्रवाई के दौरान बाउंड्रीवाल तोड़े जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह भूमि वन विभाग की थी, तो क्या बच्चों के हितों को देखते हुए कोई वैकल्पिक समाधान नहीं निकाला जा सकता था। साथ ही यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि यदि शासकीय धन से निर्मित बाउंड्रीवाल को तोड़ा गया है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

वन विभाग का पक्ष

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई विभाग को आवंटित वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है। विभाग के अनुसार नियमानुसार अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया अपनाई गई है। हालांकि प्रभावित परिवारों द्वारा लगाए गए आरोपों और बाउंड्रीवाल तोड़े जाने के संबंध में विभाग की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।

इस कार्रवाई के दौरान वन विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में मौके पर मौजूद रहे।

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