
अधिकारियों के निर्देशों की भी पटाखा व्यवसायियों को परवाह नहीं!
आदेशों के बावजूद भालेराव मैदान में नियमों की खुलेआम उड़ाई जा रही धज्जियां, नियम विरुद्ध लगाए गए पंडालों पर कार्रवाई की चुनौती
चांपा। दीपावली से पहले चांपा के भालेराव मैदान में सज रहे पटाखा बाजार में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। शासन-प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और अधिकारियों के आदेशों के बावजूद पटाखा बाजार में कथित रूप से नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पटाखा व्यवसायियों को अधिकारियों के निर्देशों की भी कोई परवाह नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पटाखा बाजार के संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, तो फिर उनके विपरीत पंडालों की स्थापना कैसे की जा रही है? क्या संबंधित अधिकारियों ने बाजार का निरीक्षण किया है? यदि निरीक्षण किया गया है तो नियमों के विपरीत स्थापित पंडालों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
आदेश के बाद भी लापरवाही, आखिर किसका संरक्षण?
भालेराव मैदान में पटाखा दुकानों के लिए निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद यदि नियमों को दरकिनार कर पंडाल स्थापित किए जा चुके हैं तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होना प्रशासनिक निगरानी की प्रभावशीलता पर सवाल उठाता है।
Will the pandals established against the rules be demolished again?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नियुक्त जिम्मेदार अधिकारी नियमों का वास्तविक पालन करवा पाएंगे? क्या नियमों के विपरीत स्थापित किए जा चुके पंडालों को दोबारा उखड़वाकर निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थापित कराया जाएगा? या फिर बाजार सज जाने के बाद अधिकारी केवल औपचारिक निरीक्षण और खानापूर्ति तक ही सीमित रहेंगे?
हादसे के बाद जागेगा प्रशासन?
पटाखा बाजार में सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बड़ी दुर्घटना को न्योता दे सकता है। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि बाजार शुरू होने से पहले प्रत्येक दुकान और पंडाल की जांच कराई जाए तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।
अब देखना यह है कि चांपा प्रशासन अपने ही निर्देशों का पालन करा पाता है या पटाखा संघ के सामने नियम और आदेश केवल कागजी साबित होते हैं।




