



दिवाली से पहले चांपा में सजा पटाखा बाजार, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
शपथ पत्र में नियमों के पालन का भरोसा, लेकिन दुकानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर लापरवाही के आरोप; जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर भी सवाल
चांपा। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही चांपा नगर के भालेराव मैदान में पटाखा बाजार सजने लगा है। आतिशबाजी के कारोबार को लेकर व्यापारियों में तैयारियां शुरू हो गई हैं, लेकिन इसी के साथ पटाखा बाजार में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पटाखा व्यवसायी शासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करेंगे या फिर हर साल की तरह इस बार भी नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे?
जानकारी के अनुसार, पटाखा लाइसेंस के नवीनीकरण से पहले व्यवसायियों द्वारा शपथ पत्र के माध्यम से शासन की गाइडलाइन और निर्धारित सुरक्षा नियमों का पालन करने की लिखित सहमति दी जाती है। लेकिन बाजार की जमीनी स्थिति को लेकर सामने आ रही शिकायतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। आरोप हैं कि पटाखा दुकानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों और आवश्यक व्यवस्थाओं की अनदेखी की जा रही है।
नियमों की अनदेखी पड़ सकती है भारी
पटाखा बाजार ऐसा संवेदनशील स्थान है, जहां छोटी सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। एक दुकान में आग लगने की स्थिति में आसपास की दुकानों तक आग पहुंचने और पूरे बाजार को अपनी चपेट में लेने का खतरा बना रहता है। ऐसे में दुकानों के बीच निर्धारित दूरी, अग्निशमन उपकरण, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था और अन्य जरूरी सुरक्षा प्रावधानों का पालन बेहद आवश्यक है।
निर्धारित मात्रा से अधिक पटाखों के भंडारण की आशंका
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पटाखा बाजार में निर्धारित सीमा से अधिक मात्रा में पटाखों के भंडारण की आशंका भी जताई जा रही है। यदि यह शिकायत सही पाई जाती है तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि पूरे बाजार और आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। हालांकि, इस संबंध में संबंधित विभाग द्वारा भंडारण की वास्तविक मात्रा की जांच किया जाना आवश्यक है।
क्या पुलिस की कार्रवाई महज औपचारिकता?
पटाखा बाजार की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पुलिस और संबंधित प्रशासनिक विभागों की भी है। सवाल उठ रहा है कि क्या पुलिस और प्रशासन द्वारा बाजार का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? क्या दुकानों में अग्निशमन व्यवस्था, निर्धारित दूरी और भंडारण क्षमता की जांच की जा रही है? यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
लाइसेंस और नवीनीकरण की जिम्मेदारी एसडीएम के पास
पटाखा दुकानों के लाइसेंस और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया में एसडीएम की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इस बार पटाखा लाइसेंस का नवीनीकरण पांच दिनों के लिए किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में लाइसेंस जारी करने और नवीनीकरण की प्रक्रिया के साथ सुरक्षा मानकों के वास्तविक पालन का सत्यापन भी जरूरी हो जाता है।
जिम्मेदार विभाग कब करेंगे निरीक्षण?
पटाखा कारोबार में व्यापारियों के आर्थिक हित अपनी जगह हैं, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। आंशिक आर्थिक लाभ के लिए यदि सुरक्षा मानकों को दरकिनार किया जाता है तो इसका खामियाजा पूरे नगर को भुगतना पड़ सकता है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन, पुलिस, अग्निशमन विभाग और संबंधित अधिकारी पटाखा बाजार का निरीक्षण कर नियमों का पालन सुनिश्चित करते हैं या फिर किसी बड़ी घटना के इंतजार में सुरक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज किया जाता रहेगा?
सवाल सीधा है—क्या चांपा का पटाखा बाजार इस दिवाली सुरक्षित रहेगा, या सुरक्षा के दावे केवल शपथ पत्रों तक ही सीमित रहेंगे?




