











एक तरफ बरसता पानी, दूसरी तरफ धधकती आग; देवराहा कॉटन इंडस्ट्रीज जलकर खाक
रात 12:30 बजे लगी आग पर सुबह करीब 9 बजे पाया गया काबू, संचालक को 35 से 40 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान; दमकल की अधूरी कार्रवाई पर उठे सवाल
चांपा। एक ओर आसमान से लगातार बरसता पानी और दूसरी ओर आग की विकराल लपटों में जलकर खाक होती फैक्ट्री। चांपा नगर के समीप देवराहा-पीथमपुर के पास स्थित कॉटन इंडस्ट्रीज, देवराहा में देर रात भीषण आग लगने से लाखों रुपये का सामान और उपकरण जलकर राख हो गए। फैक्ट्री संचालक के मुताबिक, इस अग्निकांड में करीब 35 से 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। गनीमत रही कि समय रहते आग का पता चलने और कारीगरों व मजदूरों के बाहर निकल आने से कोई जनहानि नहीं हुई।
आधी रात को फैक्ट्री में फैला धुआं, जान बचाकर बाहर निकले मजदूर
मिली जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री में रोजाना की तरह दिनभर कामकाज करने के बाद कारीगर और मजदूर रात में विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान रात करीब 12:30 बजे फैक्ट्री के भीतर अचानक धुआं फैलने लगा। सांस लेने में तकलीफ होने पर जब कारीगरों और मजदूरों ने उठकर देखा, तो फैक्ट्री में आग लगी हुई थी। इसके बाद तत्काल संचालक को फोन पर सूचना दी गई। आग की भयावहता को देखते हुए सभी कारीगर और मजदूर अपनी जान बचाने के लिए बाहर निकल आए।
सूचना मिलते ही फैक्ट्री संचालक मौके पर पहुंचे और आग बुझाने के लिए दमकल की व्यवस्था करने में जुट गए। लेकिन देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और फैक्ट्री के भीतर चारों ओर लपटें दिखाई देने लगीं। मौके पर मौजूद लोगों ने भी आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन आग की तीव्रता के सामने उनके प्रयास नाकाफी साबित हुए।
जांजगीर और चांपा से पहुंचीं दमकल, फिर भी घंटों धधकती रही आग
आग लगने की सूचना पर अग्नि शमन विभाग जांजगीर से दो दमकल वाहन मौके पर पहुंचा और आग बुझाने का प्रयास किया। इसके बाद चांपा पीआईएल की 1 दमकल गाड़ी भी घटनास्थल पर पहुंची। हालांकि, फैक्ट्री संचालक का आरोप है कि दमकल वाहनों द्वारा आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका और आग बुझाने का काम अधूरा छोड़कर कर्मचारी वापस लौट गए।
संचालक के अनुसार, आग की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त दमकल वाहन बुलाने के लिए कर्मचारियों से गुहार लगाई गई, यहां तक कि हाथ पैर भी जोड़ गया , लेकिन उनकी मांग पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि यदि समय रहते पर्याप्त दमकल वाहन और संसाधन उपलब्ध हो जाते, तो नुकसान को कम किया जा सकता था।
रात करीब 12:30 बजे शुरू हुई आग पर सुबह लगभग 9 बजे पूरी तरह काबू पाया जा सका। इस दौरान करीब साढ़े आठ घंटे तक फैक्ट्री में आग की लपटें उठती रहीं। आसपास के लोगों ने देर रात आसमान में उठती आग की ऊंची लपटें देखीं, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल बन गया।
35 से 40 लाख रुपये के नुकसान का अनुमान
फैक्ट्री संचालक के मुताबिक, अग्निकांड में करीब 15 से 20 लाख रुपये का सामान, दो स्कूटी, फैक्ट्री में लगा शेड, एक मशीन और अन्य उपकरण जलकर नष्ट हो गए। कुल नुकसान का अनुमान 35 से 40 लाख रुपये के बीच लगाया गया है। हालांकि, नुकसान की आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत आकलन होना बाकी है।
बताया जा रहा है कि फैक्ट्री में आग बुझाने के लिए अग्निशमन यंत्र भी मौजूद थे, लेकिन आग की भयावहता के सामने वे प्रभावी साबित नहीं हुए।
दमकल की कार्यप्रणाली पर सवाल, जांच की जरूरत
इस अग्निकांड के बाद दमकल व्यवस्था और आग बुझाने के लिए उपलब्ध संसाधनों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। फैक्ट्री संचालक ने आरोप लगाया है कि जब आग पूरी तरह शांत नहीं हुई थी, तब दमकल कर्मी वापस लौट गए। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या आग की गंभीरता का सही आकलन किया गया था? क्या मौके पर पर्याप्त दमकल वाहन और पानी की व्यवस्था उपलब्ध थी? और यदि आग दोबारा भड़कने की आशंका थी, तो उसे पूरी तरह बुझाए बिना दमकल वाहनों की वापसी क्यों हुई?
हालांकि, दमकल कर्मियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और वास्तविक परिस्थितियों की जांच आवश्यक है।
फिलहाल इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन फैक्ट्री संचालक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग आग लगने के कारणों, दमकल की कार्रवाई और नुकसान के आकलन की जांच कर क्या कदम उठाते हैं।




