

जांजगीर-चांपा में दो दिन भारी बारिश की संभावना, किसानों को कृषि विभाग ने दी सलाह
28 और 29 अक्टूबर को बारिश के आसार, धान की कटाई रोकने और कटी फसल सुरक्षित रखने की अपील
जांजगीर-चांपा। भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त चक्रवात पूर्वानुमान के आधार पर जिले में 28 एवं 29 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को खरीफ फसलों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है।
उप संचालक कृषि राकेश शर्मा ने किसानों से अपील की है कि पकने की अवस्था में पहुंच चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई आगामी दो से चार दिनों तक स्थगित रखें। जिन किसानों ने फसल की कटाई कर ली है, वे कटी हुई फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित एवं ऊंचे स्थान पर रखें, ताकि बारिश से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों को खेतों में अतिरिक्त वर्षा जल की निकासी के लिए नालियों की समुचित व्यवस्था करने को कहा है। साथ ही फसलों में कीट एवं रोगों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी गई है। कीट या रोग के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही उचित कीटनाशक एवं कवकनाशक का उपयोग करने को कहा गया है।
तिवड़ा एवं अलसी की बुवाई करने वाले किसानों को फिलहाल कुछ दिनों तक बुवाई स्थगित रखने की सलाह दी गई है। रबी फसलों की बुवाई मौसम अनुकूल होने और खेतों में नमी की स्थिति उचित रहने पर ही करने को कहा गया है।
सब्जी एवं बागवानी फसलों को सुरक्षित रखने पर जोर
विभाग ने फूलगोभी, ब्रोकली, कुंदरू, पपीता, खीरा एवं करेला जैसी फसलों की बुवाई मौसम अनुकूल होने पर करने की सलाह दी है। लता वाली सब्जियों के पौधों को तेज हवा से बचाने के लिए सहारे की व्यवस्था करने तथा खेतों और बगीचों में जलभराव रोकने के लिए अतिरिक्त पानी की निकासी सुनिश्चित करने को कहा गया है। वहीं, ओलावृष्टि की आशंका होने पर उपलब्धता के अनुसार सब्जी एवं बागवानी फसलों में ओलावृष्टि-रोधी जाली का उपयोग करने की सलाह दी गई है।
कृषि विभाग ने किसानों से की अपील
कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से मौसम पूर्वानुमान पर लगातार नजर रखने और मौसम की स्थिति के अनुसार कृषि कार्यों की योजना बनाने की अपील की है। किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी अथवा कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करने की सलाह दी गई है।




